क्या सच में राजस्थान के इस शापित किले की नींव में गाड़ दिया था जिंदा व्यक्ति, वीडियो में पसीने छुड़ा देने वाली सच्चाई
राजस्थान की रेत में केवल राजाओं और युद्धों की कहानियाँ ही नहीं दबी हैं, बल्कि छिपे हुए हैं कुछ ऐसे रहस्य और भयावह सच्च — जो सुनने वालों के रोंगटे खड़े कर देते हैं। ऐसा ही एक रहस्य जुड़ा है कुलधरा गांव और आसपास के कुछ किलों से, जिनमें एक कहानी बार-बार सामने आती है — किसी किले की नींव में जिंदा इंसान को दफनाया जाना।
क्या है इस दावे के पीछे की कहानी?
कई स्थानीय किंवदंतियों और बुज़ुर्गों की कथाओं के अनुसार, राजस्थान में कुछ किले और महल ऐसे बनाए गए जिनकी नींव में मानव बलि दी जाती थी। इसका मकसद होता था— इमारत को “मजबूती और शाप से मुक्ति” देना। कहा जाता है कि राजस्थान के एक प्रसिद्ध किले — जैसलमेर या भानगढ़ जैसे निर्माणों के दौरान, एक जिंदा व्यक्ति को नींव में दफनाने की रस्म निभाई गई थी।
यह प्रथा कोई साधारण रिवाज नहीं थी, बल्कि इसमें चुना गया व्यक्ति अक्सर गरीब, दलित, या समाज से बाहर का होता था जिसे बलि का बकरा बना दिया जाता। कहते हैं, ऐसा करने से किला कभी नहीं गिरेगा, लेकिन इसके पीछे आत्माओं की पीड़ा और शाप जुड़ जाते हैं।
वीडियो में देखें डरावनी सच्चाई
आज के समय में, जब यू-ट्यूब और सोशल मीडिया चैनलों ने इन रहस्यमयी स्थलों पर रात में शूटिंग की, तो कई वीडियो में अजीब घटनाएं, आवाजें, परछाइयाँ और कंपन रिकॉर्ड हुए। कई बार तो कैमरा क्रू ने आधी शूटिंग छोड़ कर भागना पड़ा।
इतिहास या अफवाह?
ऐसे दावों की पुष्टि ऐतिहासिक दस्तावेजों से करना मुश्किल है, लेकिन लोककथाएं और मौखिक परंपराएं इस बात को बार-बार दोहराती हैं। कई पुरातत्वविद इन बातों को आस्था और डर की परछाईं मानते हैं, जबकि कई ग्रामीण आज भी इन किलों के आसपास शाम ढलने के बाद जाने से डरते हैं।
क्यों डराता है यह रहस्य?
जब कोई कहता है कि इस किले के पत्थरों के नीचे एक इंसान की लाश दबाई गई है, तो chills महसूस होना लाजमी है। और जब उसी किले से रह-रह कर आती हैं कराहती हुई आवाजें, अजीब घटनाएं, तो सवाल उठता है — क्या वह आत्मा आज भी मुक्ति की तलाश में है?
निष्कर्ष
राजस्थान की रेत में बहुत से रहस्य छिपे हैं। हो सकता है यह सिर्फ अफवाह हो या फिर अतीत की एक क्रूर सच्चाई, जो आज भी हवा में तैरती है। लेकिन इतना तो तय है कि अगर दिल कमजोर है, तो ऐसे वीडियो देखने से पहले दो बार सोचिएगा।

