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400 साल पुराना इतिहास, 22 राजाओं की गाथा... 3 मिनट के शानदार वीडियो में जाने Udaipur City Palace के निर्माण की अनोखी गाथा 

400 साल पुराना इतिहास, 22 राजाओं की गाथा... 3 मिनट के शानदार वीडियो में जाने Udaipur City Palace के निर्माण की अनोखी गाथा 

चित्तौड़गढ़ किले में 25 नवंबर को पूर्व राजपरिवार के मुखिया के तौर पर विश्वराज सिंह की नियुक्ति की गई। विश्वराज सिंह मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य हैं। मेवाड़ परिवार प्रतापी शासक महाराणा प्रताप का वंशज है। ऐसे में उन्हें गद्दी पर बैठाने की परंपरा का पालन किया गया। चित्तौड़गढ़ का उत्तराधिकारी घोषित होने के बाद विश्वराज सिंह उदयपुर के सिटी पैलेस में जाकर 'धूनी स्थल' पर माथा टेकना चाहते थे, लेकिन ट्रस्ट के मौजूदा मुखिया अरविंद सिंह मेवाड़ ने इसे अवैध घोषित कर दिया। विश्वराज सिंह मेवाड़ के समर्थक उन्हें महल में न जाने देने को लेकर उदयपुर के सिटी पैलेस के बाहर सड़क पर धरना दे रहे हैं। खुद विश्वराज सिंह मेवाड़ भी वहीं बैठे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इस महल को किसने बनवाया था और इसका इतिहास क्या है।


कई महलों का समूह है
सिटी पैलेस सिर्फ एक महल नहीं बल्कि कई महलों का समूह है। महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने वर्ष 1559 में सिटी पैलेस का निर्माण शुरू करवाया था, लेकिन वे इसे पूरा नहीं करवा पाए। इसके बाद कई शासकों ने अपने शासनकाल में इसका निर्माण करवाया। महल का निर्माण 11 चरणों में पूरा हुआ। 22 राजाओं ने मिलकर इस महल का निर्माण करवाया था। उदयपुर का सिटी पैलेस नागर, राजपूत और मुगल शैली का मिश्रण है। इसे बनने में करीब 400 साल लगे थे।

त्रिपोलिया गेट का निर्माण
महल के मुख्य द्वार त्रिपोलिया गेट की सात मेहराबें सात राजाओं के वजन के सोने और चांदी के दान का प्रतीक हैं। त्रिपोलिया गेट का निर्माण 1710 में महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने करवाया था और इसके ऊपर हवा महल बना है। महाराजा भीम सिंह ने इसके निर्माण के करीब 100 साल बाद इस महल का निर्माण करवाया था। गेट के सामने की दीवार को 'अगड़' कहते हैं, जहां हाथी लड़ा करते थे। इस महल के कुछ हिस्सों को दो होटलों में बदल दिया गया है। महल के कमरे में एक पंखा है। इसे चलाने के लिए करंट की नहीं बल्कि मिट्टी के तेल की जरूरत होती है। उदयपुर का सिटी पैलेस एक अद्भुत ऐतिहासिक और स्थापत्य कला का उदाहरण है।

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