113 मंदिर, 7 दरवाजे और वीरता की अनगिनत कहानियाँ, इस वायरल डॉक्यूमेंट्री में जाने चित्तौडगढ़ किले का गौरवशाली इतिहास
राजस्थान में स्थित ये किला 7वीं शताब्दी का है और बेहद मशहूर है। इस किले का निर्माण चित्रांगद मौर्य ने करवाया था। इस किले को देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक आते हैं. इस किले का नाम चित्तौड़गढ़ किला है। ये किला काफी विशाल है. इस किले का इतिहास काफी समृद्ध है। किले की विशालता देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. चित्तौड़गढ़ किला जयपुर से 310 किलोमीटर दूर है। ये किला 700 एकड़ में फैला हुआ है और बेराच नदी के किनारे स्थित है।
यूनेस्को ने इस किले को विश्व धरोहर में शामिल किया है. ये वो किला है जहां रानी पद्मावती ने अपनी दासियों के साथ जौहर किया था. ये जौहर राजा रतन सिंह के शासनकाल में हुआ था. अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय पद्मावती ने 16 हजार दासियों के साथ चित्तौड़गढ़ किले में अग्नि समाधि ले ली थी. मेवाड़ में गुहिल वंश के संस्थापक बप्पा रावल ने मौर्य वंश के अंतिम शासक मानमोरी को युद्ध में हराकर 8वीं शताब्दी में चित्तौड़गढ़ पर अपना अधिकार स्थापित किया था। यह किला अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। आइए जानते हैं इस किले के बारे में 10 बातें।
चित्तौड़गढ़ किले के बारे में 10 बातें
चित्तौड़गढ़ किला राजस्थान का सबसे पुराना किला है। यह किला चित्रकूट पहाड़ी पर बना है।
इस किले के बारे में कहा जाता है कि 'गढ़ तो चित्तौड़गढ़ और बाकी सब गढ़ैया हैं'।
इस किले में 7 द्वार हैं। ये हैं पैदल पोल, भैरव पोल, हनुमान पोल, गणेश पोल, जॉली पोल, लक्ष्मण पोल और राम पोल।
इस किले में मंदिर, महल और जलाशय हैं। इस किले में 113 मंदिर, 14 पानी की टंकियां हैं।
यह विशाल किला 700 एकड़ में फैला हुआ है। चित्तौड़गढ़ किला बेराच नदी के तट पर स्थित है।
इस किले की लंबाई 3 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है और परिधि की लंबाई 13 किलोमीटर है।
वर्ष 2013 में यूनेस्को ने इस किले को विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया था।
किला परिसर में कई ऐतिहासिक संरचनाएं हैं जिनमें मंदिर, महल, प्रवेश द्वार और स्मारक शामिल हैं।
इसी किले में रानी पद्मावती ने अपनी दासियों के साथ जौहर किया था।
बप्पा रावल ने मौर्य वंश के अंतिम शासक मानमोरी को युद्ध में हराया और 8वीं शताब्दी में चित्तौड़गढ़ किले पर विजय प्राप्त की।

