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थार के तपते रेगिस्तान में, जहाँ जीवन की उम्मीदें अक्सर धुंधली लगती हैं, वहीं डेजर्ट नेशनल पार्क, जैसलमेर के सीने में एक नई पर्यावरणीय कहानी लिख रहा है। यह सिर्फ एक राष्ट्रीय उद्यान नहीं, बल्कि रेगिस्तान में पनपती संवेदनशील पारिस्थितिकी का प्रतीक बन चुका है – जहाँ प्रकृति, संरक्षण और जीवन का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है।
संरक्षण का गढ़ बना रेगिस्तानी पार्क
लगभग 3,162 वर्ग किलोमीटर में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान, थार रेगिस्तान के बीच स्थित है। यहाँ की जलवायु कठोर है – तपता सूरज, कम वर्षा, और रेत के विशाल टीले। फिर भी, इसी धरती पर पनप रही है 168 से अधिक वनस्पति प्रजातियाँ और सैकड़ों पक्षी व वन्यजीव।
यह पार्क खासतौर पर संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावन) के संरक्षण के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि यह पार्क राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण का मॉडल बनकर उभरा है।
मानव और प्रकृति के बीच संतुलन
डेजर्ट नेशनल पार्क एक उदाहरण है कि कैसे स्थानीय समुदायों को संरक्षण में जोड़ा जा सकता है। वन विभाग और गैर सरकारी संगठनों ने गाँवों के लोगों को न केवल प्रशिक्षित किया है, बल्कि उन्हें गाइड, ऊँट चालक, और लोक कलाकार के रूप में रोजगार भी दिया है। इससे एक ओर जहाँ आर्थिक विकास हुआ है, वहीं दूसरी ओर लोगों में पर्यावरण के प्रति चेतना भी आई है।
प्रजनन केंद्र और निगरानी तंत्र
जैसलमेर में स्थित रेगिस्तानी राष्ट्रीय पक्षी प्रजनन केंद्र (Desert National Breeding Centre) ने गोडावन की प्रजाति को विलुप्त होने से बचाने में अहम भूमिका निभाई है। यहाँ कृत्रिम प्रजनन कर पक्षियों को सुरक्षित ढंग से जंगल में छोड़ा जाता है।
इसके साथ ही पार्क क्षेत्र में CCTV कैमरे, GPS ट्रैकिंग और वन्यजीव सर्वेक्षण जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए निगरानी की जा रही है।
शिक्षा और पर्यटन के जरिए संरक्षण
पार्क प्रशासन पर्यावरण शिक्षा को भी बढ़ावा दे रहा है। स्कूलों व कॉलेजों के छात्रों के लिए प्रकृति शिविर, जागरूकता कार्यशालाएँ और वन भ्रमण का आयोजन किया जाता है।
इसके अलावा, नियंत्रित जीप और ऊँट सफारी के माध्यम से पर्यटकों को भी रेगिस्तानी पारिस्थितिकी की जानकारी दी जाती है, जिससे पर्यटन के साथ-साथ संवेदनशीलता भी विकसित हो रही है।
निष्कर्ष
डेजर्ट नेशनल पार्क आज केवल रेगिस्तान नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणादायक गाथा बन चुका है। यह स्थान बताता है कि कठोर परिस्थितियाँ भी जीवन की राह रोक नहीं सकतीं, अगर इच्छाशक्ति और समझदारी से प्रकृति के साथ तालमेल बैठाया जाए। थार के इस दिल में जो कहानी लिखी जा रही है, वह भविष्य के लिए एक अमूल्य धरोहर साबित हो सकती है।

