Pankaj Singh Birthday भारतीय कवि पंकज सिंह के जन्मदिवस पर जाने इनका जीवन संघर्ष
बिहार न्यूज डेस्क !! पंकज सिंह समकालीन हिन्दी कविता के एक महत्वपूर्ण कवि थे। उनकी गिनती हिंदी कविता के क्षेत्र में बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाले महत्वपूर्ण कवियों में होती थी। नक्सली काल में उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से उस हकीकत को उजागर किया। उन्होंने जर्मनी में भी काफी समय बिताया. पंकज सिंह ने कई पत्रिकाओं का सफल संपादन किया।
जन्म तथा शिक्षा
पंकज सिंह का जन्म 22 दिसम्बर, सन 1948 को उनके पैतृक गाँव चैता (पूर्वी चम्पारण), मुजफ्फ़रपुर ज़िला, बिहार में हुआ था। रामबाग़ के रहने वाले पंकज सिंह की प्रारंभिक पढ़ाई मुजफ्फरपुर में हुई। सत्तर के दशक में पंकज राजधानी दिल्ली स्थित 'जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय' आए थे, जहां से उन्होने अपनी पढ़ाई पूरी की। पंकज यहां आने से पहले से ही कविताएं लिख रहे थे।
कविता संग्रह
पंकज सिंह लंबे समय तक नवगीत के रचनाकार कवि राजेंद्र प्रसाद सिंह के साथ साहित्य सर्जना करते रहे। बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाले महत्वपूर्ण कवियों में वे जाने जाते थे। कवि पंकज सिंह ने कई प्रसिद्ध कविताओं की रचना की है। उनके तीन कविता संग्रह- 'आहटें आसपास' (1981) और 'जैसे पवन पानी' (2001) व 'नहीं' (2009) पूर्व में प्रकाशित हो चुकी हैं। हालांकि 'राजकमल प्रकाशन' ने फिर से तीनों काव्य संग्रह प्रकाशित किये हैं। कवि पंकज सिंह ने अनेक बार विदेश यात्राएं की थीं।[2] अपनी कविताओं में कवि पंकज ने जोखिम उठाते हुए अन्याय की सत्ताओं के खिलाफ सांस्कृतिक प्रतिरोध के साहस का शानदार परिचय दिया है। उनकी कविता 'नरक में बारिश' एक दार्शनिक नजरिए से जिन्दगी की चुनौतियों से दो-चार कराती है। पंकज सिंह ने अनेक देशी-विदेशी संकलनों में कविताएँ लिखी हैं। उन्होंने उर्दू, बांग्ला, अंग्रेज़ी, जापानी, रूसी तथा फ्रेंच आदि में भी कविताओं के अनुवाद किये।
निधन
कवि पंकज सिंह का 26 दिसंबर 2015, शनिवार को दिल्ली में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे. शनिवार दोपहर उन्होंने अपनी पत्नी सविता सिंह से सिरदर्द की शिकायत की थी। हृदय गति रुकने से उनकी मृत्यु हो गई।
आत्मकथा
कविता के संदर्भ में पंकज सिंह अक्सर मुक्तिबोध की काव्य पंक्तियों को याद करते हैं... ''नहीं होती, कहीं कविता नहीं होती/ वह तो अवाग--कुल कलायात्रा है''... और कहते हैं कि उनकी कविताओं को गति देने वाला तत्व भारतीय है। समाज के उत्पीड़ित समुदायों के संघर्ष की चेतना के साथ उनके व्यावहारिक जीवन और रचनात्मक जगत की प्रासंगिकता को प्रतिबद्ध किया। पंकज सिंह के लिए कविता अभिजात वर्ग के हितों के अनुकूल कला-कौशल नहीं बल्कि अपने ऐतिहासिक समय की सामूहिक चेतना का कलात्मक विस्तार है, उनका मानना है कि काव्य रचना उनके व्यक्तित्व का सार है।
पंकज सिंह ने अपने पहले कविता संग्रह 'आहतें पचित' और 'पवन पानी' जैसी कविताओं में भारतीय समाज में पिछली सदी के सातवें दशक की 'वसंत गर्जना' से प्रेरित जीवन शक्ति को व्यक्त करने का सार्थक जोखिम उठाया है। भाषा के अनूठे रूप में। अन्याय की शक्तियों के विरुद्ध प्रतिरोध के साहस की अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक संरचना में परिवर्तन के बड़े स्वप्न की सार्थकता-सक्रियता उन कविताओं की प्रमुख पहचान बनी। उन तत्वों से हिंदी में अनुभवजन्य गहराई और गरिमा से परिपूर्ण कवि पंकज सिंह ने जिस मौलिक राजनीतिक कविता को संभव बनाया, वह उनके नए काव्य संग्रह 'नहीं' की कविताओं में नए और अधिक जीवंत रूप में है। इन कविताओं में अनुभव-अनुकूलित शिल्प का लालित्य है। भाषण के कई स्वर हैं जो काव्य उपकरणों, ज्ञान और समग्र तकनीक के संदर्भ में हिंदी कविता के एक नए विस्तार का संकेत देते हैं।
यदि पंकज सिंह के जीवंत अनुभव में विरोधाभास और विडम्बनाएँ और अनेक सामूहिक चेतनाओं का समुच्चय है, तो व्यक्तिगत आवेग, प्रेम और लगाव, आघात-संगति और अवसाद-विषाद भी हैं, जो पंकज सिंह की कविताओं में मौजूद हैं। कुछ ऐसी बातें हैं जो गहराती हैं व्यापक और तीव्र इंद्रियों की उपस्थिति और इस अर्थ में आश्चर्यजनक है कि वे तर्क और कारण के रूपों को अपनाकर सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनते प्रतीत होते हैं। यदि कविता के कुछ शाश्वत मानदंड हैं, तो उनके सामने भी पंकज सिंह की जीवन निष्ठ कविता सार्थक और सामाजिक-सांस्कृतिक उपयोग की रहेगी, क्योंकि उसकी आत्मा में करुणा और प्रेम की एक निश्चित लय है। वह उसी सपने के प्रति प्रतिबद्ध है, जो उसे जीवन और भाषा की चतुर्आयामी विकर्षणों के बीच संतुलित और ऊर्जावान रखता है।
कार्यक्षेत्र
- कई वर्षों तक 'जनसत्ता' में नियमित कला-समीक्षा।
- 'नवभारत टाइम्स' में एक वर्ष तक साप्ताहिक स्तंभ 'विमर्श' उल्लेखनीय सम्पादन।
- फ्रेंच एन्साइक्लोपीडीया 'लारूस' में हिंदी साहित्य पर टिप्पणी।
- अनेक पाण्डुलिपियों का संपादन।
- ऑस्फोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, एन. सी. ई. आर. टी. और साहित्य अकादमी आदि के लिए अनुवाद।
- डाक्यूमेन्टरी और कथा फ़िल्मों के लिए पटकथा लेखन।
- डाक्यूमेन्टरी फ़िल्मों का निर्माण और निर्देशन।
- रेडियो और टेलीविज़न के प्रसारक और प्रस्तोता के रूप में बहुख्यात।
- संपादक की हैसियत से दूरदर्शन समाचार, ब्रिटिश उच्चायोग और कई पत्र-पत्रिकाओं से संबद्ध रहे।
- पेरिस के पौवार्त्य भाषा और सभ्यता संस्थान तथा सीपा प्रेस इंटरनेशनल के भारतीय विभागों में काम किया।
- बी.बी.सी. लंदन की विश्व सेवा में साढ़े चार वर्ष तक प्रोड्यूसर रहे।
- यात्राओं और प्रवास के दौरान विश्वविद्यालयों और संस्थानिक आयोजनों में व्याख्यान और काव्यपाठ।
- पेरिस के अंतर्राष्टीय कैता उत्सव में भारत का प्रतिनिधित्व किया।[3]
- सामजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ
- क्रांतिकारी वाम राजनीति और पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय।
- रचनात्मक लेखन के अतिरिक्त राजनीति और साहित्य, कला-संस्कृति पर निबंध और समीक्षा चर्चित।
- 'जनहस्तक्षेप' नामक संगठन के संस्थापक सदस्य और उसके कार्यक्रमों में निरंतर भागीदारी।
- विदेश यात्राएँ
- पंकज सिंह ने पेरिस (1978-80), लंदन (1987- 91), फ़्राँस और ब्रिटेन के अलावा बेल्ज़ियम, ज़र्मनी, हॉलैण्ड, ईराक़, पाकिस्तान, नेपाल आदि कई एशियाई- यूरोपीय देशों की यात्राएँ की थीं।
सम्मान व पुरस्कार
- 'मैथिलीशरण गुप्त सम्मान' (2003)
- 'शमशेर सम्मान' (2007)
- 'नई धारा सम्मान' (2008)
- 'साहित्य अकादमी' द्वारा दिया गया 2008-09 का साहित्यकार सम्मान लेने से उन्होंने इनकार कर दिया था। उन्हें 'रामजीवन शर्मा जीवन सम्मान' से भी सम्मानित किया गया था।

