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Hukum Singh Birthday भारतीय राजनीतिज्ञ हुकुम सिंह के जन्मदिन पर जानें इनका जीवन परिचय

हुकुम सिंह (अंग्रेज़ी: Hukum Singh, जन्म- 5 अप्रॅल, 1938, शामली, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 3 फ़रवरी, 2018) भारतीय राजनीतिज्ञ तथा सोलहवीं लोकसभा के सांसद थे। वे हरियाणा के मुख्यमंत्री भी रहे। 2014 के चुनावों में वे उत्तर प्रदेश.....
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हरियाणा न्यूज डेस्क !!! हुकुम सिंह (अंग्रेज़ी: Hukum Singh, जन्म- 5 अप्रॅल, 1938, शामली, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 3 फ़रवरी, 2018) भारतीय राजनीतिज्ञ तथा सोलहवीं लोकसभा के सांसद थे। वे हरियाणा के मुख्यमंत्री भी रहे। 2014 के चुनावों में वे उत्तर प्रदेश की कैराना सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर निर्वाचित हुए थे। कानून की पढ़ाई करने वाले हुकुम सिंह ने भारतीय सेना में अधिकृत अधिकारी के तौर पर काम किया। इतना ही नहीं उन्होंने 1965 की पाकिस्तान संग लड़ाई में कैप्टन पद पर रहते हुए जिम्मेदारी भी निभाई थी।

परिचय

हुकुम सिंह जी का जन्म शामली, उत्तर प्रदेश के कैराना में 5 अप्रॅल, 1938 को हुआ था। भले ही आज पूर्व सांसद हुकुम सिंह इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन राजनीति और संसदीय क्षेत्र के विकास की बात करें तो उनका नाम काफी सम्मान के साथ आज भी लिया जाता है। उत्तर प्रदेश से 7 बार विधायक भी रह चुके हुकुम सिंह सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी थे। साथ ही वे एक वकील भी थे।

राजनीति

1974 में कैराना निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। कांग्रेस के सदस्य रहते हुए उन्होंने इस निर्वाचन क्षेत्र से जीत और हार दोनों का सामना किया। हालांकि 1996 में भाजपा में शाामिल हुए और विधानसभा चुनाव लड़ा और कैराना निर्वाचन क्षेत्र के विधायक के रूप में पद बरकरार रखा। 1996-2012-2014 में कैराना निर्वाचन क्षेत्र से 16वीं लोकसभा चुनाव के लिए चुने गए।

साल 2014 में 2,36,828 वोटों के अंतर से नहिद हसन को हराते हुए हुकुम सिंह ने 16वीं लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। 2012 में बसपा के अनवर हसन को कैराना में 19,543 वोटो हराते हुए चुनाव जीता। 2007 राष्ट्रीय दल के अरशद को 8500 वोटों से हराते हुए छठी बार कैराना विधानसभा क्षेत्र से जीत का स्वाद चखा था। 2002 सपा के राजेश्वर कुमार को 10,483 मतों के अंतर से हराकर पांचवी बार एमएलए बनें थे।

योगदान

हुकुम सिंह ने युवाओं के लिए रोजगार, कृषि क्षेत्र में बढ़ोतरी और गाँवो का हर स्तर पर विकास, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य किया। जाटों के आरक्षण के लिए उन्होने लड़ाई शुरू की और 1991 में 'गुरनाम सिंह आयोग' का गठन किया।

मृत्यु

सांस लेने में तकलीफ होने के कारण 3 फ़रवरी, 2018 को हुकुम सिंह ने दम तोड़ दिया।

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