पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण की निगरानी होगी और सख्त, निर्वाचन आयोग ने चार विशेष पर्यवेक्षक किए नियुक्त
पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन– SIR) प्रक्रिया की निगरानी को और मजबूत करने के लिए निर्वाचन आयोग ने चार और विशेष सूची पर्यवेक्षक (स्पेशल रोल ऑब्जर्वर– SRO) की नियुक्ति की है। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक रतन बिस्वास, विकास सिंह, संदीप रेवाजी राठौड़ और डॉ. शैलेश को विशेष सूची पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है।
निर्वाचन आयोग का यह कदम पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। खास तौर पर आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए आयोग मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकना चाहता है। SIR प्रक्रिया के तहत नए मतदाताओं को जोड़ने, मृत मतदाताओं के नाम हटाने और डुप्लीकेट या गलत प्रविष्टियों को सुधारने का काम किया जा रहा है।
नियुक्त किए गए विशेष सूची पर्यवेक्षक अलग-अलग जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में चल रही पुनरीक्षण प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इनका काम बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की कार्यप्रणाली पर नजर रखना, मतदाता सूची में सुधार से जुड़े मामलों की समीक्षा करना और यह सुनिश्चित करना होगा कि पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद होती है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या राजनीतिक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग की ओर से पहले ही कई स्तरों पर निगरानी व्यवस्था लागू की जा चुकी है और अब अतिरिक्त SRO की नियुक्ति से इस प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जाएगा।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जाने वाले पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों की ओर से फर्जी मतदाताओं और बाहरी लोगों के नाम जोड़े जाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग का यह फैसला इन आशंकाओं को दूर करने और मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

