पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: दूसरे चरण के मतदान में कड़ा मुकाबला, टीएमसी-बीजेपी आमने-सामने
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण का मतदान जोर-शोर से संपन्न हुआ, जिसमें राज्य की कई अहम सीटों पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। इस चरण में कोलकाता, हावड़ा, हुगली और बीरभूम जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों में वोटिंग हुई, जहां मतदाताओं ने बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
चुनाव आयोग के अनुसार, दूसरे चरण में कुल 142 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, जो पूरे राज्य के राजनीतिक भविष्य को तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इस चरण में कई हाई-प्रोफाइल सीटें भी शामिल रहीं, जहां दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मतदान शांतिपूर्ण तरीके से कराने का प्रयास किया गया, हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की-फुल्की झड़पों और तनाव की खबरें भी सामने आईं।
इस चरण की सबसे चर्चित सीटों में भवानीपुर, टॉलीगंज और हावड़ा क्षेत्र शामिल रहे, जहां स्थानीय स्तर पर टीएमसी और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला देखा गया। भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्षी खेमे के प्रमुख नेताओं से जुड़ी राजनीतिक गतिविधियों ने पूरे राज्य का ध्यान आकर्षित किया। वहीं भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी कड़ा संघर्ष देखने को मिला।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चरण का मतदान पश्चिम बंगाल की सत्ता की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। टीएमसी जहां अपनी सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों के दम पर फिर से सत्ता में वापसी का दावा कर रही है, वहीं भाजपा राज्य में बदलाव और नई राजनीतिक व्यवस्था की बात कर रही है।
मतदान के दौरान कई जगहों पर भारी भीड़ देखी गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि मतदाताओं में इस चुनाव को लेकर गहरी दिलचस्पी है। चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती बड़े पैमाने पर की गई थी, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
इसी बीच, दोनों प्रमुख दलों ने एक-दूसरे पर चुनावी अनियमितताओं और दबाव की राजनीति के आरोप भी लगाए। टीएमसी नेताओं ने केंद्रीय बलों की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा ने सत्तारूढ़ दल पर वोटरों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। अब सभी की निगाहें आने वाले अंतिम चरण और उसके बाद होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी एक बार फिर ममता बनर्जी के हाथ में जाएगी या राज्य में सत्ता परिवर्तन देखने को मिलेगा।

