पश्चिम बंगाल विधानसभा में 4 अहम विधेयक पारित, एंटी-गुंडा कानून हुआ सख्त, वीडियो में देंखे OBC आरक्षण संशोधन को मंजूरी
पश्चिम बंगाल विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर मुहर लगाई गई। विधानसभा ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और आरक्षण व्यवस्था में संशोधन से जुड़े कुल चार विधेयक पारित किए। इन फैसलों को राज्य सरकार के लिए अहम माना जा रहा है।
सबसे चर्चित विधेयक एंटी-गुंडा कानून से संबंधित रहा। नए प्रावधानों के तहत पुलिस को कुछ विशेष परिस्थितियों में आरोपियों को बिना ट्रायल के अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखने का अधिकार मिलेगा। राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम संगठित अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से उठाया गया है।
इसके अलावा विधानसभा ने OBC आरक्षण से जुड़े दो संशोधन विधेयकों को भी मंजूरी दी। सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य आरक्षण व्यवस्था को कानूनी रूप से अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाना है।इसी बीच राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। सरकार के अनुसार, UCC का प्रारूप 2 जुलाई को राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और प्रस्तावित विधेयक को अगस्त में विधानसभा में पेश किए जाने की योजना है।
सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति में कानून, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, ताकि व्यापक विचार-विमर्श के बाद मसौदा तैयार किया जा सके।सरकार के मुताबिक, यह समिति एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर अंतिम ड्राफ्ट तैयार कर उसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
विधानसभा में पारित इन विधेयकों और UCC को लेकर सरकार के कदमों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। जहां सरकार इन्हें प्रशासनिक और कानूनी सुधार की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इन प्रस्तावों पर अपनी प्रतिक्रिया देने की तैयारी में है।आने वाले दिनों में इन विधेयकों के लागू होने की प्रक्रिया और UCC के मसौदे पर होने वाली चर्चा राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

