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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले SIR को लेकर हिंसक झड़पें, बीजेपी और टीएमसी में आरोप-प्रत्यारोप

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले SIR को लेकर हिंसक झड़पें, बीजेपी और टीएमसी में आरोप-प्रत्यारोप

पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, और राजनीतिक दलों ने पूरी तरह से चुनावी तैयारियों में जुटना शुरू कर दिया है। इसी बीच मतदाता सूची संशोधन (SIR) को लेकर राज्य में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है, और इसके कारण कई इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति बन गई है।

ईस्ट बर्दवान में हाल ही में SIR हियरिंग के दौरान बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हुई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हियरिंग केंद्र के पास कार्यकर्ताओं के टकराव से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। इस झड़प में कुछ कार्यकर्ताओं को मामूली चोटें भी आई हैं, जबकि पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए स्थानीय सुरक्षा बल तैनात किए।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि SIR को लेकर यह घमासान चुनावी रणनीति का हिस्सा है। टीएमसी और बीजेपी दोनों ही दल मतदाता सूची में संशोधन और नए नामों के जोड़-घटाव को लेकर जनता को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी कुछ मतदाताओं के नाम अनुचित रूप से हटा रही है, जबकि टीएमसी का दावा है कि बीजेपी कार्यकर्ता मतदाता सूची में हेरफेर की कोशिश कर रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में स्थिति को शांत करने के लिए सख्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं। पुलिस ने हियरिंग केंद्रों पर अतिरिक्त बल तैनात किया और कार्यकर्ताओं को संयम बरतने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूची संशोधन (SIR) का उद्देश्य केवल वोटिंग प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाना है। लेकिन चुनावी माहौल में इसे राजनीतिक दल अपनी रणनीति के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न केवल मतदाता प्रभावित होते हैं, बल्कि स्थानीय शांति और कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।

इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव राजनीतिक संघर्ष और प्रतिद्वंद्विता का नया मोड़ लेने जा रहे हैं। दोनों दल अपने-अपने आधार पर चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं, और SIR इसी रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में मतदाता सूची संशोधन और हियरिंग के दौरान और भी कई विवाद सामने आ सकते हैं। ऐसे में प्रशासन और पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का महत्व और बढ़ जाता है।

इस प्रकार, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच SIR को लेकर हिंसक झड़पों ने यह दिखा दिया है कि राजनीतिक तापमान तेज हो चुका है, और राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

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