Samachar Nama
×

बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य, फुटेज में जाने नए आदेश से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य, फुटेज में जाने नए आदेश से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

पश्चिम बंगाल में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है। यह आदेश 19 मई को जारी किया गया था, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक हुई है।सरकारी निर्देश के अनुसार यह नियम राज्य के सभी प्रकार के मदरसों पर लागू होगा, जिनमें सरकारी मॉडल मदरसे, सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे और बिना सहायता प्राप्त मदरसे शामिल हैं। आदेश के लागू होते ही अब प्रत्येक स्कूल दिवस की शुरुआत सुबह की प्रार्थना सभा (असेंबली) में ‘वंदे मातरम’ के गायन से करनी होगी।

इस निर्णय के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा, क्योंकि अब तक मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और कवि गुलाम मुस्तफा द्वारा रचित बांग्ला गीत ‘अनंत असीम प्रेममय तुमी’ को प्राथमिकता दी जाती थी।राज्य सरकार के इस कदम को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है। जहां एक ओर इसे राष्ट्रीयएकता और सांस्कृतिक समावेश को बढ़ावा देने वाला निर्णय बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ वर्ग इसे धार्मिक और शैक्षिक परंपराओं में बदलाव के रूप में देख रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निर्णय का प्रभाव केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह छात्रों की सांस्कृतिक और सामाजिक समझ पर भी असर डाल सकता है। वहीं प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कदम छात्रों में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।गौरतलब है कि ‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक महत्वपूर्ण राष्ट्रगीत के रूप में उभरा था और इसे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जाता है। इसे समय-समय पर विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुत किया जाता रहा है।

हालांकि, इस नए आदेश के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मदरसा शिक्षा प्रणाली में यह बदलाव किस तरह लागू होता है और इससे छात्रों, शिक्षकों तथा अभिभावकों की प्रतिक्रिया क्या रहती है। फिलहाल, राज्य में यह मुद्दा राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

Share this story

Tags