पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच पार्टी के ऋतब्रत बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग के सामने नए नामों के विकल्प रख दिए हैं। चुनाव आयोग की ओर से मौजूदा ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद दोनों गुटों से वैकल्पिक नाम और सिंबल मांगे गए थे। इसी क्रम में ऋतब्रत गुट ने अपने नाम के लिए विकल्प आयोग को सौंपे हैं।
ऋतब्रत गुट ने दिए ये नाम
रिपोर्टों के मुताबिक, ऋतब्रत बनर्जी गुट ने शुरुआत में पार्टी के नाम के लिए तीन विकल्प तय किए थे। इनमें ‘नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस’, ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस’ शामिल थे। हालांकि कुछ रिपोर्टों में आयोग को भेजे गए दो प्रमुख विकल्पों के तौर पर ‘राष्ट्रवादी तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस’ का उल्लेख किया गया है।
नामों पर पार्टी नेताओं के साथ चर्चा
बताया गया है कि ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पार्टी नेताओं के साथ ऑनलाइन बैठक के बाद नए नामों पर फैसला किया। इसके बाद इन विकल्पों को चुनाव आयोग के सामने रखा गया। आयोग के निर्देश के मुताबिक दोनों गुटों को अपनी पसंद के नाम प्राथमिकता क्रम में देने थे। आयोग इन विकल्पों में से उपचुनाव के लिए किसी नाम को मंजूरी देने वाला था।
सिर्फ नाम नहीं, सिंबल के भी विकल्प
ऋतब्रत गुट ने चुनाव चिह्न के लिए भी विकल्प दिए। रिपोर्टों के अनुसार, इस गुट ने ‘ब्लैकबोर्ड’, ‘लिफाफा’ और ‘टॉर्च’ जैसे फ्री सिंबल विकल्प आयोग को बताए थे। बाद में आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत ऋतब्रत गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया।
ममता गुट ने भी भेजे थे विकल्प
ऋतब्रत गुट से पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने भी आयोग को नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प भेजे थे। रिपोर्टों के मुताबिक, ममता गुट की ओर से ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’, ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ममता’ और ‘तृणमूल ममता कांग्रेस’ जैसे नाम सुझाए गए थे। चुनाव चिह्न के विकल्पों में फुटबॉल खिलाड़ी, प्रार्थना और क्रिकेट बैट शामिल थे। बाद में ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।
क्यों फ्रीज हुआ TMC का नाम और सिंबल?
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के भीतर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। दोनों पक्षों ने पार्टी पर अपना दावा पेश किया था। आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनाव को देखते हुए चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी किया और दोनों गुटों को मौजूदा ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम तथा ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया। आयोग ने कहा कि यह व्यवस्था विवाद पर अंतिम निर्णय होने तक लागू रहेगी।
6 अक्टूबर को उपचुनाव
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होना है। ऐसे में चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला दोनों गुटों के लिए सीधे तौर पर चुनावी पहचान से जुड़ा है। फिलहाल आयोग ने दोनों पक्षों को अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था की है। पार्टी के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला बाद की प्रक्रिया में होगा।

