तो क्या ममता बनर्जी गिरफ्तार होंगी? ED की रेड में फाइलें ले जाने का मामला बना चिंता का विषय
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने गुरुवार को पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापा मारा। जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छापे वाली जगहों पर पहुंचीं तो हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि ED की टीम चुनाव से पहले उनकी पार्टी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स जब्त करने की कोशिश कर रही थी।
हालांकि, ED ने कहा कि यह तलाशी कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई थी। ED ने ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया और दावा किया कि उन्होंने छापे के दौरान जबरन "अहम सबूत" हटा दिए। I-PAC, CM ममता बनर्जी की पार्टी TMC को पॉलिटिकल कंसल्टेंसी देती है और पार्टी के IT और मीडिया ऑपरेशंस भी संभालती है। प्रतीक जैन TMC के IT सेल के हेड भी हैं।
पश्चिम बंगाल में ED के छापे के दौरान हुई घटनाओं को लेकर अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। ED ने जांच में दखलअंदाजी का आरोप लगाते हुए याचिका दायर करने की इजाजत मांगने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया है। इस बीच, I-PAC ने भी ED की कार्रवाई की वैधता को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को हाई कोर्ट में होगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने न सिर्फ छापे वाली जगहों का दौरा किया और वहां से फाइलें लीं, बल्कि ED अधिकारियों के खिलाफ केस भी दर्ज कराया।
किसका पलड़ा भारी है?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस पूरे मामले में ED का पलड़ा भारी है। कानूनी जानकारों का कहना है कि ED को PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की धारा 67 के तहत सुरक्षा मिली हुई है। जानकारों का कहना है कि जब तक बंगाल पुलिस यह साबित नहीं कर देती कि ED अधिकारी ने कथित तौर पर निजी फायदे के लिए फाइलें और डॉक्यूमेंट्स चुराए थे, तब तक जांच के नाम पर डॉक्यूमेंट्स लेने को अपराध की श्रेणी में रखना लगभग नामुमकिन है। ED अधिकारी की गिरफ्तारी की संभावना बहुत कम है।
हालांकि, अगर ED यह साबित कर दे कि मुख्यमंत्री ने छापे वाली जगह से फाइलें ली थीं और ये फाइलें जांच के लिए अहम हैं, तो ममता बनर्जी को तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है। पूर्व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व गृह मंत्री मनीष सिसोदिया इसके हालिया उदाहरण हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रणव सिंह के मुताबिक, मुख्यमंत्री होने के बावजूद ममता बनर्जी को कोई संवैधानिक सुरक्षा या छूट नहीं मिली हुई है। संविधान सरकार के मुखिया या मंत्रियों को विधायिका के अंदर तो विशेषाधिकार देता है, लेकिन उसके बाहर नहीं।
गुरुवार को क्या हुआ? गुरुवार को, ED ने सॉल्ट लेक सेक्टर V में I-PAC के ऑफिस और लाउडन स्ट्रीट पर प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा। ये छापे कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के सिलसिले में मारे गए थे। हालांकि, ममता बनर्जी के अचानक रेड वाली जगह पर पहुंचने से सड़क पर नाटकीय सीन बन गया। ममता बनर्जी I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर दोपहर करीब 12 बजे पहुंचीं, जिसके तुरंत बाद कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा भी वहां पहुंचे। वह करीब 20-25 मिनट तक अंदर रहीं और फिर हाथ में एक हरे फोल्डर के साथ बाहर निकलीं, और ED अधिकारियों पर अपनी हद पार करने का आरोप लगाया।
ममता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, "उन्होंने हमारे IT सेल इंचार्ज के घर और ऑफिस पर छापा मारा। वे मेरी पार्टी के डॉक्यूमेंट्स और हार्ड ड्राइव जब्त कर रहे थे, जिनमें विधानसभा चुनावों के लिए हमारे पार्टी उम्मीदवारों की डिटेल्स हैं। मैंने उन्हें वापस ले लिया है।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इन चीज़ों का किसी भी फाइनेंशियल जांच से कोई लेना-देना नहीं है।

