TMC बैठक में अंदरूनी कलह के संकेत: ममता बनर्जी के सामने ही विधायकों ने अभिषेक बनर्जी पर उठाए सवाल, जहांगीर को लेकर भी तीखी टिप्पणियां
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी Trinamool Congress (TMC) की हालिया संगठनात्मक बैठक में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की मौजूदगी में चल रही थी, लेकिन इसी दौरान कुछ विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee की भूमिका और कार्यशैली पर सवाल उठा दिए।
जानकारी के मुताबिक, बैठक का माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब कुछ विधायकों ने संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया और स्थानीय नेतृत्व की अनदेखी का मुद्दा उठाया। चर्चा के दौरान आरोप लगाया गया कि पार्टी के भीतर कुछ चुनिंदा लोगों के प्रभाव के कारण जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज दब रही है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि बहस के दौरान अभिषेक बनर्जी के एक करीबी माने जाने वाले नेता जहांगीर को लेकर भी कुछ विधायकों ने तीखी टिप्पणियां कीं। बैठक में उनके कार्यशैली और संगठन में भूमिका को लेकर तंज कसे जाने की बात सामने आई है, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया।
हालांकि, पार्टी की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया गया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी ने बैठक के दौरान नेताओं को संगठन में एकजुटता बनाए रखने और सार्वजनिक रूप से विवादित बयान देने से बचने की सलाह दी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना TMC के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान का संकेत हो सकती है। पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर युवा नेतृत्व और पुराने नेताओं के बीच संतुलन को लेकर चर्चाएं तेज रही हैं। ऐसे में यह बैठक में सामने आया असंतोष पार्टी के लिए संगठनात्मक चुनौती बन सकता है।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस खबर को लेकर TMC पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी के भीतर असहमति अब खुलकर सामने आ रही है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि, TMC के कई नेताओं ने इस तरह की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया है और दावा किया है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों का आदान-प्रदान सामान्य प्रक्रिया है और इसे आंतरिक फूट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व आगे इस स्थिति को कैसे संभालता है।

