बकरीद से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, वीडियो में जाने पशु वध गाइडलाइन पर रोक से इनकार; कुर्बानी विवाद पर बढ़ी सियासत
Calcutta High Court ने बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल सरकार की पशु वध संबंधी गाइडलाइन पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना वैध फिटनेस सर्टिफिकेट के गाय, भैंस, बैल या बछड़े का वध नहीं किया जा सकता। कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य में कुर्बानी और अवैध स्लॉटरहाउस को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है।
चीफ जस्टिस Sujay Paul और जस्टिस पार्थ सारथी की बेंच ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी तरह का पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। अदालत ने यह भी कहा कि नियमों का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है और प्रशासन को सुनिश्चित करना होगा कि कहीं भी अवैध तरीके से पशु वध न हो।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने Supreme Court of India के पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ईद-उल-जुहा में गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं मानी गई है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने बकरीद को देखते हुए पशु वध के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन गाइडलाइन में वैध प्रमाणपत्र, तय स्थानों पर ही वध और स्वच्छता संबंधी नियमों का पालन अनिवार्य किया गया है। कुछ संगठनों और नेताओं ने इन नियमों को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
इधर, पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता और विधायक Humayun Kabir ने गाइडलाइन का विरोध करते हुए बयान दिया है कि ईद पर हर हाल में कुर्बानी दी जाएगी। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में विवाद और तेज हो गया है।
वहीं Bharatiya Janata Party ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में अवैध स्लॉटरहाउस चलने नहीं दिए जाएंगे। भाजपा नेताओं ने प्रशासन से कानून का सख्ती से पालन कराने की मांग की है।
बकरीद से पहले आए इस फैसले को लेकर राज्य में प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी गई है। कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की तैयारी की जा रही है ताकि त्योहार के दौरान किसी तरह का तनाव पैदा न हो।
फिलहाल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि पश्चिम बंगाल में बकरीद के दौरान पशु वध केवल तय नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकेगा। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर बनी हुई है।

