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उत्तराखंड: रुद्रप्रयाग के क्यूडी मलाश गांव ने रचा इतिहास, शराब पर पूर्ण प्रतिबंध का लिया सामूहिक निर्णय

उत्तराखंड: रुद्रप्रयाग के क्यूडी मलाश गांव ने रचा इतिहास, शराब पर पूर्ण प्रतिबंध का लिया सामूहिक निर्णय

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद अंतर्गत अगस्त्यमुनि विकास खंड के क्यूडी मलाश (दशजूला) गांव ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कदम उठाया है। गांव की नई पीढ़ी को नशे की लत से बचाने और गढ़वाली संस्कृति व सामाजिक मूल्यों को संरक्षित करने के उद्देश्य से ग्राम सभा ने शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का कड़ा फैसला लिया है। इस निर्णय को गांव के सामाजिक जीवन में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

इस संबंध में 11 जनवरी को गांव में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता वन पंचायत सरपंच ने की। बैठक में ग्राम सभा के सदस्य, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में शराब के दुष्प्रभावों पर चिंता जताई और गांव को नशामुक्त बनाने के पक्ष में सहमति व्यक्त की।

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि शराब की वजह से गांव में घरेलू विवाद, आर्थिक तंगी और युवाओं के भविष्य पर नकारात्मक असर देखने को मिल रहा था। कई परिवारों में रोज़गार की आय शराब पर खर्च हो रही थी, जिससे बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहे थे। महिलाओं ने विशेष रूप से शराब से होने वाली पारिवारिक समस्याओं को खुलकर सामने रखा।

ग्राम सभा ने निर्णय लिया कि अब गांव की सीमा में शराब की बिक्री, सेवन और भंडारण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस फैसले को प्रभावी बनाने के लिए निगरानी समिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया है। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर सामाजिक दंड और आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही दोबारा गलती करने पर ग्राम सभा द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्णय केवल नशे से मुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य गढ़वाली संस्कृति, सामाजिक एकता और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करना भी है। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि पहले के समय में समाज में आपसी सहयोग, संस्कार और अनुशासन अधिक था, लेकिन नशे की बढ़ती प्रवृत्ति ने इन परंपराओं को कमजोर कर दिया है।

युवाओं ने भी इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि शराब के कारण कई प्रतिभाशाली युवा गलत राह पर चले जाते हैं। गांव को नशामुक्त बनाकर उन्हें शिक्षा, खेल और रोजगार की ओर प्रेरित किया जा सकेगा। कुछ युवाओं ने नशा मुक्ति अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की भी घोषणा की।

महिलाओं ने ग्राम सभा के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया। उनका कहना है कि शराबबंदी से घरेलू हिंसा, पारिवारिक कलह और आर्थिक संकट में कमी आएगी। इससे घर का माहौल बेहतर होगा और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

क्यूडी मलाश गांव का यह फैसला अब आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बन गया है। सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने इसे एक मॉडल गांव पहल बताया है। माना जा रहा है कि यह कदम अन्य गांवों को भी नशामुक्त समाज की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।

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