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नंदा-गौरा योजना पर हाई कोर्ट सख्त, चीफ जस्टिस ने उत्तराखंड सरकार को लगाई फटकार

नंदा-गौरा योजना पर हाई कोर्ट सख्त, चीफ जस्टिस ने उत्तराखंड सरकार को लगाई फटकार

उत्तराखंड की चर्चित नंदा-गौरा योजना को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा। योजना के क्रियान्वयन और पात्र लाभार्थियों को समय पर सहायता नहीं मिलने से जुड़े मामले में मुख्य न्यायाधीश ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार के पास योजना के लिए बजट उपलब्ध नहीं है तो योजना को बंद ही कर देना चाहिए। अदालत की इस टिप्पणी के बाद नंदा-गौरा योजना को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

नंदा-गौरा योजना उत्तराखंड सरकार की महत्वपूर्ण सामाजिक कल्याण योजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को शिक्षा और विवाह के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सरकारी सहायता दी जाती है।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की ओर से शुरू की गई किसी भी कल्याणकारी योजना का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचना चाहिए। यदि लाभार्थियों को योजना का लाभ देने में बजट या अन्य किसी कारण से समस्या आ रही है तो सरकार को उसका स्पष्ट समाधान तलाशना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी को सरकार के लिए गंभीर संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। अदालत ने अप्रत्यक्ष रूप से यह सवाल उठाया कि यदि किसी योजना के लिए पर्याप्त बजट नहीं है तो उसे जारी रखने का औचित्य क्या है। योजना के नाम पर पात्र लोगों को उम्मीद देने के बाद उन्हें लाभ नहीं मिलना उचित नहीं माना जा सकता।

नंदा-गौरा योजना से बड़ी संख्या में परिवार जुड़े हुए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए मिलने वाली सहायता बेटियों की शिक्षा और विवाह के खर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में योजना के लाभ में देरी या पात्र लाभार्थियों को सहायता नहीं मिलने से परिवारों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद अब सरकार की ओर से योजना के बजट, लंबित आवेदनों और पात्र लाभार्थियों को भुगतान की स्थिति पर स्पष्ट जवाब दिए जाने की उम्मीद है। मामले की आगे की सुनवाई में सरकार को अपनी स्थिति अदालत के सामने रखनी होगी।

हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद नंदा-गौरा योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। अब देखना होगा कि सरकार लंबित मामलों के निपटारे और योजना के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने को लेकर क्या कदम उठाती है।

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