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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होना पड़ा भारी, उत्तराखंड के कॉन्स्टेबल बर्खास्त; विभागीय जांच में गंभीर कदाचार का दोषी

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होना पड़ा भारी, उत्तराखंड के कॉन्स्टेबल बर्खास्त; विभागीय जांच में गंभीर कदाचार का दोषी

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने वाले उत्तराखंड पुलिस के एक कॉन्स्टेबल को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। विभागीय जांच में पुलिसकर्मी को गंभीर कदाचार और सेवा नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ यह सख्त कार्रवाई की गई।

विभागीय जांच में दोषी पाए गए

उत्तराखंड पुलिस की ओर से की गई विभागीय जांच में पाया गया कि कॉन्स्टेबल का आचरण सेवा नियमों के अनुरूप नहीं था। जांच रिपोर्ट में उन्हें अनुशासनहीनता और सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का दोषी माना गया। इसके आधार पर सक्षम प्राधिकारी ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।

20 जुलाई को किया गया था निलंबित

जानकारी के अनुसार, संबंधित कॉन्स्टेबल को 20 जुलाई को ही निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद विभागीय जांच शुरू की गई, जिसमें विभिन्न साक्ष्यों और तथ्यों की समीक्षा की गई। जांच पूरी होने के बाद विभाग ने उनके खिलाफ अंतिम कार्रवाई करते हुए नौकरी से बर्खास्त करने का निर्णय लिया।

सेवा नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख

पुलिस विभाग का कहना है कि वर्दीधारी कर्मियों से सेवा आचरण नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। यदि कोई कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करता है या ऐसा आचरण करता है जिससे विभाग की छवि प्रभावित होती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।

अनुशासन बनाए रखने पर जोर

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अनुशासन किसी भी सुरक्षा बल की सबसे बड़ी ताकत होता है। इसलिए सेवा नियमों के उल्लंघन के मामलों में विभाग की नीति स्पष्ट है और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाती है।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में अनुशासन और सेवा नियमों के पालन को लेकर एक बार फिर सख्त संदेश गया है। हालांकि, यदि संबंधित कर्मचारी नियमों के तहत उपलब्ध कानूनी या विभागीय अपील का विकल्प अपनाना चाहें, तो उन्हें नियमानुसार इसका अधिकार प्राप्त है।

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