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उत्तराखंड में आज से जनगणना का दूसरा चरण शुरू, पहली बार जाति से जुड़े सवाल होंगे शामिल

उत्तराखंड में आज से जनगणना का दूसरा चरण शुरू, पहली बार जाति से जुड़े सवाल होंगे शामिल

उत्तराखंड में जनगणना-2027 के दूसरे चरण की शुरुआत 1 सितंबर से होने जा रही है। इस चरण में प्रदेश के चार जिलों के दुर्गम और बर्फीले इलाकों को शामिल किया गया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में जनगणना कर्मी घर-घर पहुंचकर लोगों से जरूरी जानकारी जुटाएंगे। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास है, क्योंकि पहली बार जाति से जुड़े सवाल भी जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी की जाएगी।

चार जिलों के दुर्गम क्षेत्रों में होगी गणना

जनगणना के दूसरे चरण में उत्तराखंड के चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिलों के दुर्गम और उच्च हिमालयी क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में कई गांव काफी ऊंचाई पर स्थित हैं और यहां पहुंचना सामान्य इलाकों की तुलना में चुनौतीपूर्ण है।

प्रशासन ने जनगणना कार्य के लिए कर्मचारियों की तैनाती कर दी है। प्रगणक और पर्यवेक्षक घर-घर जाकर परिवारों से संबंधित निर्धारित जानकारी दर्ज करेंगे। बर्फीले क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए अभियान को लेकर विशेष तैयारी की गई है।

पहली बार जाति से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे

जनगणना-2027 की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक जातिगत जानकारी का संग्रह है। इस बार जनगणना में लोगों से जाति से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे। इससे देश में विभिन्न जातीय समूहों की आबादी से जुड़ा व्यापक आंकड़ा तैयार करने में मदद मिल सकती है।

जाति से संबंधित जानकारी जनगणना के निर्धारित प्रपत्र में दर्ज की जाएगी। इस प्रक्रिया के दौरान लोगों से सही जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की जाएगी।

पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल

इस बार जनगणना को डिजिटल तरीके से कराने पर विशेष जोर दिया गया है। कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करते हुए आंकड़ों को डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा। इससे डाटा को व्यवस्थित करने और आगे की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

डिजिटल प्रक्रिया के चलते जनगणना के दौरान जुटाए गए आंकड़ों के प्रबंधन और निगरानी को भी बेहतर बनाया जा सकेगा। इसके लिए संबंधित कर्मचारियों को तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी दी गई है।

बर्फीले इलाकों में चुनौतीपूर्ण होगा काम

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जनगणना करना आसान नहीं होगा। कई गांव सड़क मार्ग से दूर हैं और कुछ स्थानों तक पहुंचने के लिए पैदल सफर करना पड़ता है। मौसम में अचानक बदलाव और बर्फबारी भी चुनौती पैदा कर सकती है।

इसके बावजूद प्रशासन ने तय समय के अनुसार अभियान शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। अधिकारियों का प्रयास है कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाला कोई भी परिवार जनगणना से छूट न जाए।

विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण होगा डेटा

जनगणना से मिलने वाला आंकड़ा सरकार के लिए भविष्य की योजनाएं तैयार करने में महत्वपूर्ण होता है। आबादी, परिवारों और सामाजिक संरचना से जुड़ी जानकारी के आधार पर विभिन्न सरकारी योजनाओं और संसाधनों की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।

उत्तराखंड में 1 सितंबर से शुरू होने वाला यह दूसरा चरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पहली बार जाति से जुड़े सवाल और डिजिटल प्रक्रिया दोनों शामिल हैं। अब जनगणना कर्मियों की टीम दुर्गम और बर्फीले क्षेत्रों में पहुंचकर घर-घर आंकड़े जुटाएगी।

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