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सरकारी स्कूलों का हाल: कहीं बाबू संभाल रहे प्रिंसिपल की कुर्सी, छात्र खुद पढ़ाई के साथ कर रहे सफाई

सरकारी स्कूलों का हाल: कहीं बाबू संभाल रहे प्रिंसिपल की कुर्सी, छात्र खुद पढ़ाई के साथ कर रहे सफाई

राज्य के सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर की गई पड़ताल में कई जगह चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई स्थानों पर प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी संभालने के बजाय कार्यालय से जुड़े कर्मचारी यानी बाबू प्रशासनिक कामकाज में प्रमुख भूमिका निभाते नजर आए। वहीं, कुछ स्कूलों में छात्रों को पढ़ाई के साथ परिसर की सफाई भी करनी पड़ रही है।

आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान की पड़ताल के दौरान सामने आए मामलों में स्कूलों की व्यवस्थाओं में कई स्तर पर खामियां दिखाई दीं। कहीं शिक्षकों की कमी की वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो कहीं स्कूल परिसर की साफ-सफाई के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई।

छात्रों पर बढ़ रहा अतिरिक्त बोझ

स्कूल में पढ़ने के लिए आने वाले विद्यार्थियों को जहां किताबों और कक्षाओं पर ध्यान देना चाहिए, वहीं कुछ स्थानों पर उन्हें सफाई जैसे काम भी करने पड़ रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई और स्कूल के शैक्षणिक माहौल पर असर पड़ने की आशंका है।

सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के साथ सुरक्षित और साफ वातावरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और स्कूल प्रशासन की होती है। ऐसे में छात्रों से नियमित रूप से सफाई कराने की स्थिति व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

प्रिंसिपल की जगह बाबू संभाल रहे जिम्मेदारी

पड़ताल में कुछ स्कूलों में यह भी सामने आया कि प्रधानाचार्य की भूमिका से जुड़े कामों में कार्यालय कर्मचारियों की सक्रियता अधिक दिखाई दी। आरोप है कि कुछ जगह बाबू ही प्रिंसिपल की तरह व्यवस्था संभालते नजर आए।

प्रधानाचार्य का पद स्कूल की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में पद की जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। यदि किसी स्कूल में प्रधानाचार्य का पद रिक्त है या किसी कारण से प्रभारी व्यवस्था लागू है तो विभाग की ओर से निर्धारित नियमों के अनुसार जिम्मेदारी तय की जाती है।

व्यवस्था सुधारने की जरूरत

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, स्वच्छता, प्रशासनिक व्यवस्था और विद्यार्थियों की सुविधाएं सीधे शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ी हैं। ऐसे में सामने आई तस्वीरों और रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभाग को स्कूलों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करनी होगी।

स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, नियमित सफाई व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित होने पर विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकता है। अब देखना होगा कि पड़ताल में सामने आई कमियों के बाद शिक्षा विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

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