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उपनल कर्मचारियों का आरोप- सरकार जबरन करवा रही अनुबंध, विरोध करने पर वेतन कटौती और सेवा से ब्रेक

उपनल कर्मचारियों का आरोप- सरकार जबरन करवा रही अनुबंध, विरोध करने पर वेतन कटौती और सेवा से ब्रेक

उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ की ओर से हाई कोर्ट में कहा गया कि सरकार उपनल कर्मियों से जबरन नए अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर हस्ताक्षर करवा रही है। जो कर्मचारी इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।संघ का आरोप है कि अनुबंध करने से इनकार करने वाले कर्मचारियों की सैलरी काटी जा रही है या उन्हें सेवा से ब्रेक दिया जा रहा है। कर्मचारियों ने इसे उनके अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए न्यायालय में अपनी बात रखी है।

हाई कोर्ट में रखी कर्मचारियों ने अपनी परेशानी

उपनल कर्मचारी संघ की ओर से दलील दी गई कि लंबे समय से विभिन्न विभा में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों पर नए नियमों को मानने का दबाव बनाया जा रहा है। संघ का कहना है कि कर्मचारियों को अपनी नौकरी बचाने के लिए मजबूरी में अनुबंध स्वीकार करना पड़ रहा है।कर्मचारियों ने अदालत के सामने यह भी कहा कि अनुबंध प्रक्रिया में पारदर्शिता न बरती जा रही है और विरोध करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।

वेतन कटौती और सेवा से हटाने का आरोप

संघ ने आरोप लगाया कि कई कर्मचारियों के साथ अनुबंध न करने पर सख्ती बरती जा रही है। कुछ कर्मचारियों की सैलरी रोकने या काटने की शिकायतें सामने आई हैं, जबकि कुछ को सेवा से ब्रेक देने की बात कही गई है।कर्मचारी संगठन का कहना है कि उपनल कर्मी लंबे समय से विभिन्नसरकारी विभागों में काम कर रहे हैं और उनकी सेवाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार का पक्ष आना बाकी

मामले में सरकार की ओर से पक्ष अभी सामने आना बाकी है। कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार होगी।उपनल कर्मचारियों का मामला उत्तराखंड में लंबे समय से चर्चा में रहा है। कर्मचारी नियमितीकरण, समान कार्य के बदले समान वेतन और सेवा सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर समय-समय पर अपनी मांगें उठाते रहे हैं।

कर्मचारियों में बढ़ रहा आक्रोश

हाई कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद उपनल कर्मचारियों में एक बार फिर नाराजगी बढ़ गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में उनके साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।अब सभी की नजर हाई कोर्ट की सुनवाई और आने वाले आदेश पर टिकी हुई है। कोर्ट के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अनुबंध प्रक्रिया और कर्मचारियों की मांगों को लेकर आगे क्या दिशा तय होगी।

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