उत्तराखंड में CNG कीमतों को लेकर हड़कंप, अलग-अलग शहरों में रेट भिन्न होने से उपभोक्ता परेशान
ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच उत्तराखंड में सीएनजी (CNG) के दामों को लेकर उपभोक्ताओं में असंतोष देखने को मिल रहा है। राज्य के विभिन्न शहरों में अलग-अलग दरों पर सीएनजी मिलने से लोग इसे “मनमानी” और “अव्यवस्थित मूल्य निर्धारण” बता रहे हैं।
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि एक ही राज्य के भीतर अलग-अलग शहरों में सीएनजी के दामों में अंतर से आम जनता को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। खासकर टैक्सी, ऑटो और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े लोग इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं, क्योंकि उनकी रोजमर्रा की कमाई सीधे ईंधन लागत पर निर्भर करती है।
जानकारी के अनुसार, गैस वितरण से जुड़ी कंपनियों द्वारा अलग-अलग परिवहन लागत, आपूर्ति व्यवस्था और स्थानीय टैक्स ढांचे के आधार पर कीमतें तय की जाती हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और कीमतों में असमानता लगातार बढ़ रही है।
परिवहन संचालकों का कहना है कि बढ़ते ईंधन खर्च के कारण किराए में बढ़ोतरी करना उनकी मजबूरी बन रही है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। कई ड्राइवरों ने इसे “आर्थिक दबाव” बताते हुए सरकार से एक समान दर नीति लागू करने की मांग की है।
वहीं, उपभोक्ता संगठनों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है और मांग की है कि राज्य स्तर पर सीएनजी के लिए एक समान मूल्य व्यवस्था लागू की जाए, ताकि सभी शहरों में उपभोक्ताओं को समान दर पर ईंधन मिल सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि सीएनजी जैसी स्वच्छ ईंधन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कीमतों में स्थिरता और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि दरों में असमानता बनी रहती है, तो लोग फिर से पारंपरिक ईंधन की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे पर्यावरणीय लक्ष्यों पर भी असर पड़ेगा।
फिलहाल, यह मुद्दा राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है और उपभोक्ता उम्मीद कर रहे हैं कि संबंधित विभाग इस पर जल्द कोई ठोस नीति बनाकर राहत देगा।

