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विकासनगर में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, मृत महिला को जिंदा समझकर इलाज कराता रहा परिवार

विकासनगर में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, मृत महिला को जिंदा समझकर इलाज कराता रहा परिवार

उत्तराखंड के विकासनगर क्षेत्र से स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। हरबर्टपुर स्थित एक निजी अस्पताल प्रबंधन की कथित अनदेखी के कारण एक परिवार अपनी मृत बहू को जिंदा समझकर करीब 20 किलोमीटर तक तीन अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर काटता रहा।

जानकारी के अनुसार, यह घटना तब सामने आई जब अस्पताल की ओर से केवल पुलिस को महिला की मौत की सूचना दी गई, लेकिन परिजनों को इस बारे में अंधेरे में रखा गया। अस्पताल प्रशासन की इस कथित लापरवाही के चलते परिजन अपनी बहू को बचाने की उम्मीद में उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक ले जाते रहे।

परिजनों का कहना है कि अस्पताल स्टाफ ने सही जानकारी समय पर नहीं दी, जिसके कारण उन्हें लगातार इधर-उधर भटकना पड़ा। इस दौरान परिवार मानसिक और भावनात्मक रूप से गहरे सदमे में रहा। जब तक उन्हें सच्चाई का पता चला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

इस घटना ने स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि निजी अस्पतालों में पारदर्शिता और संवेदनशीलता की कमी ऐसी घटनाओं को जन्म देती है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मामले के सामने आने के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। संबंधित अस्पताल के खिलाफ जांच की मांग उठने लगी है और अधिकारियों ने पूरे प्रकरण की जांच के संकेत दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की भूमिका और अस्पताल की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि मरीजों और उनके परिजनों के साथ मानवीय व्यवहार कितना जरूरी है। अस्पतालों को चाहिए कि वे आपात स्थिति में सही और समय पर जानकारी दें, ताकि ऐसी दर्दनाक स्थितियों से बचा जा सके।

स्थानीय लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।

कुल मिलाकर, विकासनगर की यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत को उजागर करती है और यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक आम लोगों को ऐसी लापरवाही का शिकार होना पड़ेगा।

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