श्रीनगर गढ़वाल में ओजोन प्रदूषण ने तोड़े रिकॉर्ड, 880 माइक्रोग्राम/घन मीटर के पार पहुंचा स्तर
उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल में ओजोन प्रदूषण को लेकर चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। यहां ओजोन का स्तर 880 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से भी अधिक दर्ज किया गया, जो दिल्ली में दर्ज 440 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के स्तर से करीब दोगुना है। ओजोन प्रदूषण का यह स्तर स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ाने वाला है।
आमतौर पर वायु प्रदूषण की चर्चा होने पर दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों का नाम सामने आता है, लेकिन श्रीनगर गढ़वाल में ओजोन का इतना अधिक स्तर दर्ज होना पहाड़ी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े करता है। ओजोन एक द्वितीयक प्रदूषक है, जो सीधे किसी स्रोत से उत्सर्जित होने के बजाय वातावरण में विभिन्न गैसों के बीच रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बनता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन के करीब मौजूद ओजोन यानी ग्राउंड लेवल ओजोन मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसका अधिक स्तर होने पर आंखों में जलन, गले में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक अधिक प्रदूषण के संपर्क में रहने पर इसका असर श्वसन तंत्र पर भी पड़ सकता है।
श्रीनगर गढ़वाल में सामने आया यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र पहाड़ों के बीच स्थित है और इसे मैदानी महानगरों की तुलना में अपेक्षाकृत कम प्रदूषण वाला क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में यहां ओजोन का स्तर 880 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ऊपर पहुंचना पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए अध्ययन का विषय बन सकता है।
ओजोन का निर्माण मौसम और वातावरण की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। धूप, तापमान और वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों जैसी गैसों के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं से जमीन के करीब ओजोन बन सकता है। इसलिए किसी क्षेत्र में अचानक ओजोन का स्तर बढ़ने के पीछे स्थानीय और क्षेत्रीय दोनों कारणों की भूमिका हो सकती है।
दिल्ली में ओजोन का स्तर 440 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज होने की तुलना में श्रीनगर गढ़वाल का आंकड़ा लगभग दोगुना बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर माप की परिस्थितियां, समय और निगरानी केंद्रों की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए आंकड़ों की वैज्ञानिक व्याख्या करते समय इन पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
ओजोन प्रदूषण का बढ़ता स्तर स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विभाग के लिए निगरानी बढ़ाने का संकेत हो सकता है। नियमित मॉनिटरिंग के जरिए यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि प्रदूषण का स्तर कितने समय तक इतना अधिक रहता है और इसके पीछे प्रमुख कारण क्या हैं।
श्रीनगर गढ़वाल में सामने आए इस आंकड़े ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि वायु प्रदूषण अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। पहाड़ी शहरों में भी प्रदूषकों की नियमित निगरानी और वायु गुणवत्ता से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत बढ़ रही है। आने वाले समय में विस्तृत अध्ययन से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि श्रीनगर में ओजोन के असामान्य रूप से बढ़े स्तर के पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार हैं।

