शहीद लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी को नम आंखों से अंतिम विदाई, मां के शब्द सुन हर आंख हुई नम
देश की सेवा करते हुए शहीद हुए लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल रहा और हर तरफ "भारत माता की जय" तथा "शहीद अमर रहें" के नारों की गूंज सुनाई दी।
शहीद अधिकारी के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी। इस दौरान परिवार के सदस्यों का दर्द देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
मां का दर्द सुन भावुक हुए लोग
शहीद की मां, जो एक प्रधानाध्यापिका हैं, बेटे को याद करते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, "उसने कहा था कि जल्द घर आऊंगा, लेकिन वह अपना यह वादा पूरा नहीं कर पाया।" मां के ये शब्द सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।
उन्होंने कहा कि बेटे को देश सेवा का जुनून था और वह हमेशा अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानता था। परिवार को उस पर गर्व है, लेकिन उसके चले जाने का दर्द जीवन भर रहेगा।
दादी का विलाप देख रो पड़े लोग
अंतिम यात्रा के दौरान शहीद की दादी और अन्य परिजनों का विलाप देखकर माहौल बेहद भावुक हो गया। दादी बार-बार अपने पोते को याद कर रोती रहीं। परिवार के सदस्यों को ढांढस बंधाने के लिए लोग आगे आते रहे, लेकिन दुख की इस घड़ी में किसी के पास शब्द नहीं थे।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
शहीद अधिकारी की अंतिम यात्रा में स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सेना के जवानों ने हिस्सा लिया। लोगों ने फूल बरसाकर और तिरंगा लहराकर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।
अंतिम यात्रा के दौरान सड़कों के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग खड़े होकर शहीद को नमन करते नजर आए। कई लोगों ने कहा कि देश ऐसे वीर जवानों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता।
पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को याद किया।
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की शहादत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। हालांकि, उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति पर हर किसी को गर्व है। उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।

