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हिमालय बनने से पहले उत्तराखंड में था जीवन! झील में मिले 100 से 150 करोड़ साल पुराने जीवाश्म

हिमालय बनने से पहले उत्तराखंड में था जीवन! झील में मिले 100 से 150 करोड़ साल पुराने जीवाश्म

उत्तराखंड की एक प्राचीन झील के क्षेत्र में वैज्ञानिकों को ऐसे जीवाश्म मिले हैं, जो पृथ्वी के बेहद पुराने इतिहास से जुड़े रहस्यों पर नई रोशनी डाल सकते हैं। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों के सर्वे में करीब 100 से 150 करोड़ साल पुराने जीवाश्म मिलने की जानकारी सामने आई है। इन खोजों से संकेत मिलता है कि जिस क्षेत्र में आज हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं मौजूद हैं, वहां हिमालय के अस्तित्व में आने से बहुत पहले भी जीवन मौजूद था।

वैज्ञानिकों के लिए यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे हिमालय क्षेत्र के भूगर्भीय इतिहास और उस समय मौजूद पर्यावरण को समझने में मदद मिल सकती है।

झील क्षेत्र में मिले प्राचीन जीवाश्म

वैज्ञानिकों की टीम ने उत्तराखंड के एक झील क्षेत्र में भूगर्भीय सर्वे के दौरान प्राचीन चट्टानों और उनमें संरक्षित जीवाश्मों का अध्ययन किया। शुरुआती आकलन के मुताबिक इनकी उम्र करीब एक से डेढ़ अरब वर्ष तक हो सकती है।

ये जीवाश्म उस दौर के माने जा रहे हैं जब पृथ्वी की वर्तमान भौगोलिक संरचना बिल्कुल अलग थी। उस समय न तो आज जैसा हिमालय था और न ही पृथ्वी के महाद्वीप अपनी मौजूदा स्थिति में थे।

हिमालय से भी पुराना है क्षेत्र का इतिहास

वाडिया संस्थान के सर्वे से सामने आए निष्कर्ष हिमालय के निर्माण से पहले इस क्षेत्र में मौजूद भूगर्भीय परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय का निर्माण करोड़ों वर्ष पहले भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर के कारण हुआ।

ऐसे में एक अरब वर्ष से भी पुराने जीवाश्मों का मिलना यह बताता है कि वर्तमान हिमालयी क्षेत्र के भूगर्भीय इतिहास की जड़ें पर्वत निर्माण की प्रक्रिया से कहीं ज्यादा पुरानी हैं।

उस दौर में कैसी थी पृथ्वी?

वैज्ञानिकों के लिए सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि करीब एक अरब वर्ष पहले उत्तराखंड का यह क्षेत्र कैसा दिखाई देता था। आज जहां पहाड़, घाटियां और हिमालयी नदियां दिखाई देती हैं, वहां उस समय बिल्कुल अलग भौगोलिक परिस्थितियां रही होंगी।

जीवाश्मों के अध्ययन से वैज्ञानिक उस समय के जलाशयों, पर्यावरण और जीवन के स्वरूप के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जुटा सकते हैं। चट्टानों में सुरक्षित ऐसे प्रमाण पृथ्वी के प्राचीन पर्यावरण को समझने के लिए बेहद उपयोगी माने जाते हैं।

भूगर्भीय इतिहास समझने में मिलेगी मदद

वाडिया संस्थान लंबे समय से हिमालय के भूगर्भीय विकास, चट्टानों, भूकंपीय गतिविधियों और पर्वत निर्माण से जुड़े विषयों पर शोध करता रहा है। उत्तराखंड में मिले ये प्राचीन जीवाश्म भी इसी वैज्ञानिक अध्ययन का हिस्सा हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि जीवाश्मों और आसपास की चट्टानों का विस्तृत अध्ययन करने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उस समय इस इलाके में किस तरह का वातावरण था और वहां जीवन किन परिस्थितियों में मौजूद था।

पृथ्वी के इतिहास का खुल रहा नया अध्याय

करीब 100 से 150 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्मों की खोज सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के प्राचीन जीवन और भूगर्भीय बदलावों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यह खोज इस बात का प्रमाण देती है कि आज का हिमालयी क्षेत्र बनने से बहुत पहले भी यहां जीवन और जल आधारित पर्यावरण मौजूद हो सकता था।

यानी जिस धरती पर आज हिमालय की विशाल चोटियां खड़ी हैं, उसके नीचे और चट्टानों में अरबों साल पुरानी जीवन की कहानी छिपी हुई है। वैज्ञानिकों का विस्तृत अध्ययन इस प्राचीन झील और यहां मिले जीवाश्मों के जरिए पृथ्वी के उस दौर की तस्वीर सामने ला सकता है, जब हिमालय का नामोनिशान तक नहीं था।

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