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बद्रीनाथ के पास टूटा कंचनगंगा ग्लेशियर, बड़ा हादसा टला; वैज्ञानिक बोले- बदल रहा हिमालय का मौसम चक्र

बद्रीनाथ के पास टूटा कंचनगंगा ग्लेशियर, बड़ा हादसा टला; वैज्ञानिक बोले- बदल रहा हिमालय का मौसम चक्र

उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम के पास स्थित कंचनगंगा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने की घटना सामने आई है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि इस घटना ने हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से बदल रहे मौसम और ग्लेशियरों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय में बर्फबारी का पैटर्न तेजी से बदल रहा है, जिससे ग्लेशियर कमजोर होते जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, कंचनगंगा क्षेत्र में ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने इलाके की निगरानी बढ़ा दी है। शुरुआती रिपोर्ट में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेत के रूप में देख रहे हैं।

पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों में अब मौसम का स्वरूप पहले जैसा नहीं रहा। पहले जहां जनवरी और फरवरी में भारी बर्फबारी होती थी, वहीं अब मार्च और अप्रैल में अधिक हिमपात देखने को मिल रहा है। इस बदलाव के कारण ग्लेशियरों की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि देर से होने वाली बर्फबारी और तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव ग्लेशियरों को कमजोर बना रहे हैं। जब बर्फ सही समय पर नहीं गिरती और लंबे समय तक तापमान अस्थिर रहता है, तो ग्लेशियरों में दरारें पड़ने और उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

हिमालयी क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में ग्लेशियर टूटने, हिमस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का असर अब स्पष्ट रूप से हिमालय पर दिखाई देने लगा है। इसका प्रभाव न केवल पर्यावरण बल्कि वहां रहने वाले लोगों और तीर्थ यात्राओं पर भी पड़ सकता है।

बद्रीनाथ और आसपास के क्षेत्रों में चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में ग्लेशियरों से जुड़ी घटनाएं प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा उपाय और बढ़ाए जाएंगे।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जलवायु परिवर्तन की गति इसी तरह बनी रही तो आने वाले वर्षों में हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे नदियों के जलस्तर, मौसम चक्र और पहाड़ी क्षेत्रों के जीवन पर व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल कंचनगंगा ग्लेशियर टूटने की घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन इसने एक बार फिर हिमालय में बदलते पर्यावरणीय हालात और ग्लेशियरों की बिगड़ती स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं

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