जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण ने BJP से दिया इस्तीफा, कांग्रेस में जाने की अटकलें तेज
उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के पिता और भाजपा नेता रामशरण नौटियाल ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, रामशरण नौटियाल पिछले कुछ समय से पार्टी में खुद को असहज महसूस कर रहे थे और स्थानीय नेताओं के रवैये को लेकर नाराज बताए जा रहे थे।
रामशरण नौटियाल देहरादून जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में भाजपा के टिकट पर चकराता विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह से हुआ था। रामशरण नौटियाल को 27,417 वोट मिले थे, जबकि प्रीतम सिंह को 36,853 वोट मिले थे।
लंबे समय से नाराजगी की चर्चा
रामशरण नौटियाल की भाजपा के स्थानीय नेताओं से नाराजगी पहले भी सामने आती रही है। वर्ष 2023 में उन्होंने अपनी ही पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं को लेकर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए थे। रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में चल रही राजनीतिक खींचतान और स्थानीय नेताओं के रवैये से वह काफी समय से असहज बताए जा रहे थे। हालांकि, उनके इस्तीफे की विस्तृत वजह को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग जानकारी सामने आई है।
कांग्रेस में वापसी की चर्चा
भाजपा से इस्तीफे के बाद रामशरण नौटियाल के अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। रामशरण नौटियाल पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और बाद में भाजपा में शामिल हुए थे। इसी वजह से उनके कांग्रेस में वापस जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा हो रही है। हालांकि, अभी तक उनकी ओर से कांग्रेस में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी चर्चा है कि अगर वह कांग्रेस में शामिल होते हैं तो विकासनगर या सहसपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की संभावना हो सकती है। हालांकि, यह फिलहाल राजनीतिक अटकलें हैं और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भाजपा की ओर से भी उनके इस्तीफे को लेकर शुरुआती स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ऐसे में रामशरण नौटियाल का अगला राजनीतिक कदम उत्तराखंड की स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। खास तौर पर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले उनके फैसले पर राजनीतिक दलों और समर्थकों की नजर है।

