10 हजार फीट की ऊंचाई पर भारत-अमेरिका की सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास, आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में ड्रोन और रोबोटिक डॉग भी शामिल
भारत और अमेरिका की सेनाएं 10 हजार फीट की ऊंचाई पर संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रही हैं। आतंकवाद विरोधी अभियानों पर केंद्रित इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों के सैनिक ऊंचाई वाले इलाकों में विभिन्न परिस्थितियों से निपटने का अभ्यास कर रहे हैं। यह संयुक्त ऑपरेशन 28 सितंबर तक चलेगा।
इस सैन्य अभ्यास में आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान ड्रोन और रोबोटिक डॉग को शामिल किया गया है। इन तकनीकों के जरिए सैनिकों को कठिन और चुनौतीपूर्ण इलाकों में निगरानी तथा अन्य सैन्य कार्यों के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
ऊंचाई वाले इलाके में संयुक्त ट्रेनिंग
10 हजार फीट की ऊंचाई पर सैन्य अभियान चलाना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है। कम तापमान, दुर्गम भूभाग और ऑक्सीजन की कमी जैसी परिस्थितियों में सैनिकों को काम करने का अभ्यास कराया जा रहा है।
संयुक्त अभ्यास के दौरान भारतीय और अमेरिकी सैनिक एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर अभियान चलाने की प्रक्रियाओं का अभ्यास कर रहे हैं। इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच आपसी समन्वय और संचालन क्षमता को बेहतर करना है।
ड्रोन और रोबोटिक डॉग का इस्तेमाल
अभ्यास में ड्रोन और रोबोटिक डॉग जैसे आधुनिक उपकरणों को भी शामिल किया गया है। ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है। वहीं, रोबोटिक डॉग का उपयोग कठिन स्थानों की जांच और सैनिकों के जोखिम को कम करने वाली तकनीक के तौर पर अभ्यास में किया जा रहा है।
तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सैन्य बलों के प्रशिक्षण में ऐसे उपकरणों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। संयुक्त अभ्यास में इनके इस्तेमाल से सैनिकों को आधुनिक उपकरणों के साथ काम करने का अनुभव मिल रहा है।
28 सितंबर तक चलेगा अभ्यास
भारत और अमेरिका के बीच होने वाला यह संयुक्त युद्धाभ्यास 28 सितंबर तक जारी रहेगा। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़ी विभिन्न परिस्थितियों में संयुक्त रूप से प्रशिक्षण लेंगे।
इस तरह के सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग और आपसी समझ को बढ़ाने के लिए आयोजित किए जाते हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्र में होने वाले इस अभ्यास में पारंपरिक सैन्य प्रशिक्षण के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी प्रमुख हिस्सा है।

