छह साल बाद शुरू होने वाला भारत-चीन व्यापार फिर टला, वीडियो में जाने लिपुलेख दर्रे के व्यापारी नई तारीख के इंतजार में
उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के रास्ते होने वाला पारंपरिक भारत-चीन सीमा व्यापार एक बार फिर अटक गया है। करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद व्यापार शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन चीन की ओर तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण इसकी शुरुआत टाल दी गई है।
भारतीय व्यापारियों को 8 जुलाई तक चीन के तकलाकोट पहुंचना था, लेकिन वहां मंडी, दुकानों और गोदामों की व्यवस्था पूरी नहीं होने के कारण व्यापार शुरू करने की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। फिलहाल करीब 100 भारतीय व्यापारी उत्तराखंड के गुंजी और नाबीढांग इलाके में नई तारीख का इंतजार कर रहे हैं।
चीन की ओर से नहीं मिली नई तारीख
व्यापारियों के मुताबिक, अभी तक चीन की ओर से व्यापार शुरू करने की नई तारीख घोषित नहीं की गई है। व्यापारी तकलाकोट मंडी की तैयारियां पूरी होने और आधिकारिक अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।भारतीय प्रशासन को चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गई है कि तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए दुकानों और गोदामों का निर्माण कार्य अभी जारी है। जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक भारतीय व्यापारियों को सीमा पार जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
भारतीय व्यापारियों के लिए बनाया जा रहा नया भवन
इस बार चीन की ओर से भारतीय व्यापारियों के लिए विशेष व्यापारिक भवन तैयार किया जा रहा है। इस भवन में व्यापारियों को किराये पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा सामान रखने के लिए गोदामों की भी व्यवस्था की जा रही है।चीन की ओर से कहा गया है कि भवन और गोदाम पूरी तरह तैयार होने के बाद ही व्यापारिक गतिविधियां शुरू हो सकेंगी। इससे पहले व्यापारियों को तकलाकोट पहुंचने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
छह साल बाद व्यापार बहाल होने की थी उम्मीद
लिपुलेख दर्रे से होने वाला भारत-चीन सीमा व्यापार दोनों देशों के बीच सदियों पुराने कारोबारी संबंधों का हिस्सा रहा है। उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों के व्यापारी इस व्यापार के जरिए चीन के तिब्बत क्षेत्र के साथ कारोबार करते रहे हैं।हालांकि, वर्ष 2020 में भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद यह व्यापार बंद हो गया था। अब छह साल बाद इसे दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन व्यवस्थाओं की कमी के कारण इसमें देरी हो रही है।
व्यापारियों को आर्थिक नुकसान की चिंता
सीमा व्यापार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय से बंद पड़े कारोबार को दोबारा शुरू करने के लिए वे तैयार हैं। कई व्यापारी अपने सामान और जरूरी तैयारियों के साथ गुंजी और नाबीढांग पहुंच चुके हैं।अब उनकी नजर चीन की ओर से आने वाली नई तारीख और व्यापार शुरू होने की आधिकारिक घोषणा पर टिकी है। व्यापारियों को उम्मीद है कि जल्द ही सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी और लिपुलेख मार्ग से एक बार फिर भारत-चीन व्यापार शुरू हो सकेगा।

