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23 मई से शुरू होगी हेमकुंड साहिब यात्रा, सेना ने बर्फ काटकर तैयार किया रास्ता

23 मई से शुरू होगी हेमकुंड साहिब यात्रा, सेना ने बर्फ काटकर तैयार किया रास्ता

सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यात्रा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं और भारतीय सेना के जवान कठिन परिस्थितियों में मार्ग को सुगम बनाने में जुटे हुए हैं।

जानकारी के अनुसार, लगभग 15,210 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब तक पहुंचने वाला मार्ग सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण पूरी तरह बंद हो जाता है। ऐसे में हर साल यात्रा शुरू होने से पहले सेना के जवानों को बर्फ हटाकर रास्ता तैयार करना पड़ता है। इस बार भी सेना की टीम ग्लेशियर क्षेत्रों में कड़ी मेहनत कर रही है और करीब 3 किलोमीटर तक जमी बर्फ को काटकर रास्ता साफ किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी, तेज हवाएं और लगातार बदलते मौसम के बीच जवान दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। इसके बावजूद वे तय समय से पहले रास्ता तैयार करने में जुटे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

यात्रा से जुड़ी तैयारियों के तहत पहला जत्था 20 मई को ऋषिकेश से रवाना होगा। प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन समिति भी यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। तीर्थयात्रियों को यात्रा से पहले पंजीकरण कराने और मौसम से जुड़ी जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

हेमकुंड साहिब, उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक प्रमुख सिख तीर्थ स्थल है, जो हिमालय की गोद में बसा हुआ है। यह स्थान गुरु गोबिंद सिंह जी की तपस्थली माना जाता है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। समुद्र तल से करीब 4,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह धाम अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।

हर वर्ष की तरह इस बार भी सेना और सेवादार मिलकर यात्रा मार्ग को तैयार कर रहे हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु हेमकुंड साहिब यात्रा में शामिल होंगे।

फिलहाल, बर्फ हटाने का काम अंतिम चरण में है और जल्द ही पूरा मार्ग श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। ऐसे में श्रद्धालुओं के बीच यात्रा को लेकर उत्साह साफ तौर पर देखा जा रहा है।

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