उत्तराखंड में ऑरेंज अलर्ट के बीच हेलीकॉप्टर उड़ान पर उठे सवाल, यूकाडा बोला- उड़ान के समय मौसम था साफ
उत्तराखंड के जोशीमठ में हेलीकॉप्टर हादसे के बाद अब खराब मौसम के बीच उड़ान की अनुमति दिए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मौसम विभाग ने चमोली समेत प्रदेश के कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। इसके बावजूद हेलीकॉप्टर उड़ान भरने की बात सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि मौसम खराब होने की चेतावनी के बीच हेली सेवा को संचालन की अनुमति क्यों दी गई।
वहीं, उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) का कहना है कि हेलीकॉप्टर ने जब उड़ान भरी थी, उस समय मौसम साफ था। प्राधिकरण के इस बयान के बाद मौसम विभाग की चेतावनी और वास्तविक उड़ान परिस्थितियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
चमोली समेत कई जिलों में था ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के चमोली सहित कई जिलों में खराब मौसम की आशंका जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। इस चेतावनी में मौसम की स्थिति को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताई गई थी। पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदलता है। ऐसे में बारिश, तेज हवाओं और कम दृश्यता जैसी परिस्थितियां हवाई सेवाओं के संचालन को प्रभावित कर सकती हैं।
हेलीकॉप्टर हादसे के बाद मौसम विभाग के अलर्ट को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि दुर्घटना से पहले ही खराब मौसम की चेतावनी जारी की गई थी।
यूकाडा ने दी सफाई
दूसरी ओर, यूकाडा ने स्पष्ट किया है कि हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरते समय मौसम साफ होने के कारण ही उड़ान भरी थी। यानी प्राधिकरण के अनुसार, उड़ान के वक्त मौसम की परिस्थितियां अनुकूल थीं।
हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम का मिजाज अचानक बदल सकता है। उड़ान के समय मौसम साफ होने के बावजूद आगे के रास्ते में परिस्थितियां बदलने की आशंका रहती है। ऐसे में उड़ान के दौरान मौसम की स्थिति और सुरक्षा संबंधी फैसलों की भूमिका अहम हो जाती है।
हादसे के बाद जांच में अहम होंगे ये सवाल
हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद अब यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि उड़ान से पहले मौसम का आकलन किस आधार पर किया गया था। क्या पूरे रूट के मौसम की जानकारी ली गई थी और उड़ान के दौरान मौसम में कोई बदलाव आया था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
फिलहाल यूकाडा के बयान और मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बीच हेलीकॉप्टर उड़ान को लेकर बहस जारी है। हादसे की जांच में मौसम संबंधी परिस्थितियों और उड़ान से जुड़े फैसलों की भी पड़ताल अहम हो सकती है।

