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OSD के घर ED रेड पर हरीश रावत ने फिर मांगी माफी, बोले- CM रहते हुई थी एक चूक

OSD के घर ED रेड पर हरीश रावत ने फिर मांगी माफी, बोले- CM रहते हुई थी एक चूक

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद मामला लगातार चर्चा में है। इसी बीच हरीश रावत एक बार फिर सोशल मीडिया पर सामने आए और अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हुई एक चूक को लेकर माफी मांगी। रावत ने कहा कि वह इस चूक के लिए पहले भी माफी मांग चुके हैं और अब दोबारा क्षमा मांग रहे हैं।

रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति से जुड़ी एक चूक हुई थी। उन्होंने कहा कि वह पहले भी इस मामले में अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग चुके हैं और अब फिर से माफी मांग रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में हुई सरकारी नियुक्तियों की जांच कराई जा सकती है और यदि कहीं उनके पद के दुरुपयोग की बात सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

यह पूरा मामला उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की वर्ष 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी जांच के बीच सामने आया है। ED ने इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच के तहत चंदन सिंह जीना के घर समेत कई ठिकानों पर कार्रवाई की थी। जीना 2014 से 2017 के बीच रावत के ओएसडी रहे थे और बाद में उनके निजी सहायक के रूप में भी काम करते रहे।

ED की कार्रवाई के दौरान जीना के घर से 32 लाख रुपये की नकदी, सोने के सिक्के और अन्य सामान मिलने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी ने बैंक खातों में मौजूद कुछ रकम को भी फ्रीज किया है। हालांकि, इन बरामदगियों और जांच में सामने आए आरोपों का अंतिम कानूनी निष्कर्ष अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

ED की कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने चंदन सिंह जीना का बचाव भी किया है। उन्होंने कहा कि जीना लंबे समय से उनके साथ काम करते रहे हैं। रावत ने भर्ती परीक्षा में ओएमआर शीट से कथित छेड़छाड़ के आरोपों पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्हें इन आरोपों पर भरोसा नहीं है। साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई तथ्य सामने आता है तो संबंधित व्यक्ति को जवाब देना होगा।

इस घटनाक्रम के बीच रावत ने कांग्रेस में अपने कुछ संगठनात्मक पदों से हटने की इच्छा भी जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनकी वजह से पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आशय पार्टी छोड़ने से नहीं था, बल्कि संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने से था।

अब रावत की दोबारा माफी वाली सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हुई नियुक्तियों और संबंधित फैसलों की जांच कराने की बात कही है। वहीं, भर्ती परीक्षा से जुड़े मामले में जांच एजेंसियां अपनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं। मामले में सामने आने वाले दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की तस्वीर साफ होगी।

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