Gen Z Doctors Protest: उत्तराखंड में तेज हुआ जेन-जी डॉक्टरों का आंदोलन, 1 लाख से ज्यादा सैलरी की मांग
उत्तराखंड में जेन-जी डॉक्टरों का आंदोलन अब जोर पकड़ता नजर आ रहा है। इंटर्न और पीजी डॉक्टर अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं। डॉक्टरों की मांग है कि उन्हें 1 लाख रुपये से अधिक मासिक वेतन दिया जाए। अपनी मांग को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने के लिए डॉक्टरों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी मुहिम शुरू की थी।
जेन-जी डॉक्टरों की यह मुहिम अब धीरे-धीरे व्यापक रूप लेती दिखाई दे रही है। डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद इंटर्नशिप और पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान उन्हें लंबे समय तक काम करना पड़ता है। कई बार ड्यूटी के घंटे भी काफी अधिक होते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय उनकी जिम्मेदारियों और काम के अनुपात में पर्याप्त नहीं है।
इंटर्न और पीजी डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में मरीजों की देखभाल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उनके ऊपर होती है। आपातकालीन सेवाओं से लेकर वार्ड और अन्य विभागों में उन्हें लगातार काम करना पड़ता है। ऐसे में वे अपने मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुरूप बेहतर वेतन की मांग कर रहे हैं।
डॉक्टरों ने अपनी आवाज को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए X पर अभियान चलाया। सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने अपनी मांग को सामने रखा और अन्य डॉक्टरों से भी समर्थन की अपील की। जेन-जी डॉक्टरों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी बात सरकार और संबंधित अधिकारियों तक तेजी से पहुंच सकती है।
उत्तराखंड में डॉक्टरों की इस मांग ने स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल कर्मचारियों के वेतन को लेकर भी चर्चा छेड़ दी है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मेडिकल स्टाफ को बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के साथ उचित आर्थिक सम्मान भी मिलना चाहिए।
वहीं, आंदोलन के बढ़ने के साथ अब सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और वेतन को लेकर कोई सकारात्मक फैसला सामने आएगा।
जेन-जी डॉक्टरों की यह मुहिम केवल वेतन तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया पर इसे युवा डॉक्टरों के अधिकारों और काम के उचित मूल्य की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन को लेकर क्या कदम उठाती है और डॉक्टरों की 1 लाख रुपये से अधिक वेतन की मांग पर क्या फैसला होता है।

