Samachar Nama
×

MBBS एडमिशन में फर्जीवाड़ा: स्वतंत्रता सेनानी कोटे का लाभ लेने के लिए फर्जी पते और AI से बनाई फोटो का इस्तेमाल

MBBS एडमिशन में फर्जीवाड़ा: स्वतंत्रता सेनानी कोटे का लाभ लेने के लिए फर्जी पते और AI से बनाई फोटो का इस्तेमाल

एमबीबीएस दाखिलों में स्वतंत्रता सेनानी कोटे का लाभ उठाने के लिए कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक सिंडिकेट ने पात्रता हासिल करने के लिए पहचान पत्रों में फर्जी पते दर्ज करवाए। इतना ही नहीं, कथित तौर पर स्वतंत्रता सेनानी की फोटो तक AI की मदद से तैयार की गई और फर्जी तरीके से रिश्ता जोड़कर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने की कोशिश की गई।

मामले की जानकारी सामने आने के बाद फर्जी दस्तावेजों और दाखिले की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि सिंडिकेट में शामिल लोगों ने स्वतंत्रता सेनानी कोटे के नियमों का फायदा उठाने के लिए दस्तावेज तैयार करने की पूरी व्यवस्था की थी। इसके तहत उम्मीदवारों के पहचान संबंधी दस्तावेजों में ऐसे पते दर्ज कराए गए, जिनका वास्तविकता से कथित तौर पर कोई संबंध नहीं था।

जांच में यह भी सामने आया कि स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर पात्रता दिखाने के लिए उनकी तस्वीर तक तैयार करने का प्रयास किया गया। इसके लिए AI तकनीक का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। इसके बाद उम्मीदवार और कथित स्वतंत्रता सेनानी के बीच ऐसा रिश्ता दर्शाया गया, जिससे कोटे के तहत मेडिकल एडमिशन का लाभ लिया जा सके।

मामला सामने आने के बाद संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू की गई। अधिकारियों की जांच में यदि दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो संबंधित उम्मीदवारों और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही ऐसे दाखिलों को भी रद्द करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

इस मामले ने मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण और विशेष कोटे के तहत दाखिले के लिए दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। स्वतंत्रता सेनानी कोटे जैसे प्रावधानों का लाभ केवल निर्धारित पात्रता और वैध दस्तावेजों के आधार पर ही दिया जाता है। ऐसे में फर्जी पते, नकली दस्तावेज और AI से तैयार तस्वीरों के इस्तेमाल के आरोप गंभीर माने जा रहे हैं।

फिलहाल जांच एजेंसियां कथित सिंडिकेट से जुड़े लोगों, दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया और दाखिले के लिए इस्तेमाल किए गए रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और कितने अभ्यर्थियों ने कथित फर्जीवाड़े के जरिए MBBS में दाखिला लेने का प्रयास किया।

Share this story

Tags