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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, 92 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; राज्य में शोक की लहर

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, 92 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; राज्य में शोक की लहर

उत्तराखंड की राजनीति से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री Bhuwan Chandra Khanduri का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने देहरादून स्थित मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली, जहां वे पिछले लगभग दो महीनों से उपचाराधीन थे।

सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे भुवन चंद्र खंडूरी को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था, लेकिन उम्र संबंधी जटिलताओं के चलते उनकी तबीयत में सुधार नहीं हो सका।

उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। समर्थकों और शुभचिंतकों में भारी मायूसी का माहौल है।

भुवन चंद्र खंडूरी भारतीय राजनीति के एक सशक्त और अनुशासित नेता के रूप में जाने जाते थे। वे अपने सादगीपूर्ण जीवन, ईमानदार छवि और प्रशासनिक दक्षता के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते रहे हैं। उनके नेतृत्व में उत्तराखंड में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकासात्मक फैसले लिए गए, जिनका असर लंबे समय तक देखा गया।

अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और केंद्र व राज्य दोनों स्तरों पर अपनी सेवाएं दीं। उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही, जो पारदर्शिता और सुशासन को प्राथमिकता देते थे।

निधन की सूचना के बाद राज्य सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। कई नेताओं ने इसे उत्तराखंड की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खंडूरी न केवल एक राजनेता थे, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपने काम और व्यवहार से जनता के बीच अलग पहचान बनाई। उनकी ईमानदारी और सादगी को हमेशा याद किया जाएगा।

फिलहाल, उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और बाद में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किए जाने की संभावना है। प्रशासन द्वारा अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं।

भुवन चंद्र खंडूरी के निधन से उत्तराखंड ने एक अनुभवी, सशक्त और जनसेवा के प्रति समर्पित नेता को खो दिया है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं मानी जा रही है।

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