उत्तराखंड में अगले 24 घंटे भारी, 12 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा; अगले 3 घंटे बारिश का अलर्ट
उत्तराखंड में मानसून के सक्रिय रहने के बीच मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों और अगले 24 घंटे के लिए मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है। राज्य के कई हिस्सों में अगले तीन घंटे के दौरान हल्की से भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के 12 जिलों में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का खतरा जताया गया है। मौसम विभाग के फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल के अनुसार 11 अगस्त की शाम 5:30 बजे तक इन जिलों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में कम से मध्यम स्तर का फ्लैश फ्लड जोखिम बना रह सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन घंटे के दौरान केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री, सोनप्रयाग, ऊखीमठ, जोशीमठ, कर्णप्रयाग, थराली, कपकोट, धारचूला, मुनस्यारी और आसपास के कई इलाकों में बारिश की संभावना है। चमोली, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी के कुछ क्षेत्रों में भी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की भी संभावना जताई गई है।
इन 12 जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा
फ्लैश फ्लड बुलेटिन के मुताबिक अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी गढ़वाल में कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ का जोखिम है। लगातार बारिश और मिट्टी में बढ़ी नमी के कारण निचले इलाकों में पानी का तेज बहाव और जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
चमोली में बादल फटने के बाद पुल बहा
बारिश के बीच चमोली जिले की नीति घाटी में सोमवार शाम बादल फटने की घटना भी सामने आई। तेज बारिश के बाद तमक नाला अचानक उफान पर आ गया और बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन का एक पुल बह गया। घटना में एक युवक के लापता होने की सूचना भी है। वहीं, अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने नदी किनारे रहने और आवाजाही करने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।
प्रशासन अलर्ट, लोगों से सावधानी की अपील
मौसम की चेतावनी को देखते हुए राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट मोड पर है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से हालात पर निगरानी रखी जा रही है और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने और नदी-नालों के आसपास नहीं जाने की अपील की है।
पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, सड़क बाधित होने और अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में स्थानीय लोगों के साथ चारधाम यात्रियों और पर्यटकों को भी मौसम विभाग तथा प्रशासन के ताजा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

