दिल्ली मेट्रो में चोरी के मामले पर उपभोक्ता आयोग का फैसला, कहा- ‘सफर अपने जोखिम पर करें’, मेट्रो प्रबंधन जिम्मेदार नहीं
दिल्ली मेट्रो में चोरी से जुड़े एक मामले पर उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग ने अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा कि मेट्रो में यात्रा के दौरान सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह मेट्रो प्रबंधन की नहीं मानी जा सकती। यात्रियों को सफर के दौरान अपने सामान की सुरक्षा खुद करनी होगी।आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए साफ किया कि यदि किसी यात्री का सामान चोरी हो जाता है तो हर स्थिति में मेट्रो प्रबंधन को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यात्री को यात्रा के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए और सफर अपने जोखिम पर करना चाहिए।
मेट्रो यात्रा के दौरान चोरी का था मामला
मामला दिल्ली मेट्रो में यात्रा कर रहे एक यात्री के सामान चोरी होने से जुड़ा था। यात्री ने चोरी के बाद मेट्रो प्रबंधन के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी और नुकसान की भरपाई की मांग की थी।शिकायतकर्ता का तर्क था कि मेट्रो में यात्रा के दौरान उसके सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी मेट्रो प्रशासन की होनी चाहिए। लेकिन मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
आयोग ने मेट्रो प्रबंधन को माना जिम्मेदार नहीं
उत्तराखंड उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में कहा कि सार्वजनिक परिवहन सेवा का मतलब यह नहीं है कि यात्री के निजी सामान की पूरी जिम्मेदारी सेवा प्रदाता की हो जाएगी।आयोग के अनुसार, यात्री को अपने सामान की देखभाल खुद करनी होती है। चोरी जैसी घटनाओं के लिए हर बार परिवहन संस्था को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह
फैसले के बाद यह संदेश भी सामने आया है कि यात्रियों को सफर के दौरान अपने सामान को लेकर सतर्क रहना चाहिए। भीड़भाड़ वाले स्थानों, मेट्रो स्टेशन और कोच में यात्रियों को अपने बैग, मोबाइल, पर्स और अन्य कीमती सामान की सुरक्षा खुद करनी चाहिए।विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक जगहों पर व्यक्तिगत सावधानी बेहद जरूरी होती है, क्योंकि हर घटना के लिए किसी संस्था को जिम्मेदार नहीं बनाया जा सकता।
फैसले पर चर्चा शुरू
उपभोक्ता आयोग के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और लोगों के बीच बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे व्यावहारिक फैसला बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए।हालांकि, आयोग के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यात्रा के दौरान निजी सामान की जिम्मेदारी यात्री की भी होती है। मेट्रो या किसी अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवा से यात्रा करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

