बारावफात जुलूस में सीएम धामी को धमकी का आरोप, मदरसों को लेकर दिए बयान पर मुख्यमंत्री ने किया पलटवार
उत्तराखंड में बारावफात जुलूस के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को कथित तौर पर धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक मुस्लिम धर्मगुरु मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए मदरसों को बंद करने के मुद्दे पर आपत्तिजनक और धमकी भरी टिप्पणी करता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि जुलूस के दौरान धर्मगुरु ने कहा कि अगर मदरसों को बंद करने की कोशिश की गई तो मुसलमान जवाब देगा और फिर भागने का मौका नहीं मिलेगा। इस बयान को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ खुली धमकी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और बयान के पूरे संदर्भ की आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री धामी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में कानून और संविधान से ऊपर कोई नहीं है। सरकार का रुख है कि राज्य में किसी भी तरह की धमकी, अराजकता या कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सभी नागरिकों को अपने धर्म और आस्था के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता है, लेकिन कानून का पालन करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। सरकार किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मदरसों को लेकर उत्तराखंड में पहले भी बहस होती रही है। सरकार की ओर से मदरसों की व्यवस्था, पंजीकरण और वहां दी जा रही शिक्षा को लेकर समय-समय पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, मुस्लिम संगठनों का कहना है कि धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों को लेकर किसी भी कार्रवाई से पहले समुदाय की चिंताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
बारावफात के दौरान दिए गए कथित बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कुछ लोगों ने इसे कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया है, जबकि अन्य लोगों ने बयान के पूरे संदर्भ की जांच किए जाने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन की ओर से मामले की जांच और वीडियो की सत्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। यदि बयान की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, मुख्यमंत्री धामी के जवाब के बाद यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में भी तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

