भाजपा ने दिनेश आर्य को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार, हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद के बीच बड़ा राजनीतिक संदेश
उत्तराखंड की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए भाजपा ने दिनेश आर्य को अपना उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने रविवार को उनके नाम का ऐलान किया। राज्य की राजनीति में अपेक्षाकृत कम चर्चित रहे दिनेश आर्य का नाम सामने आने से भाजपा के कई नेता और उनके समर्थक भी हैरान बताए जा रहे हैं। आर्य लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं और नैनीताल के भाजपा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने आर्य की उम्मीदवारी पर केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताते हुए इसे संगठन के सामान्य और जमीनी कार्यकर्ताओं के सम्मान से जोड़ा। पार्टी की ओर से कहा गया है कि दिनेश आर्य लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं और उनके अनुभव का लाभ राज्यसभा में मिलेगा।
कौन हैं दिनेश आर्य?
दिनेश आर्य नैनीताल जिले के भवाली क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से हल्द्वानी तथा कुमाऊं क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। वह नैनीताल भाजपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। फिलहाल उन्हें राज्य मंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त है और वह राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष हैं। इसके अलावा वह भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चे में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
आर्य ने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले नैनीताल सीट से भाजपा टिकट की दावेदारी भी की थी। हालांकि उस समय पार्टी ने किसी दूसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारा था। अब चार साल बाद भाजपा ने उन्हें सीधे राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है।
हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद से जुड़ा राजनीतिक संदेश
दिनेश आर्य को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने का समय भी चर्चा में है। कुछ समय पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी में हुई रैली के बाद रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम को लेकर विवाद हुआ था। कांग्रेस ने इस घटना को दलित सम्मान से जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा था। वहीं भाजपा ने कार्यक्रम से अपना संबंध होने से इनकार किया था और पार्टी नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया था।
अब इसी कुमाऊं क्षेत्र से आने वाले अनुसूचित जाति वर्ग के नेता दिनेश आर्य को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद राजनीतिक संदेश को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ रिपोर्टों में इसे कांग्रेस के उन आरोपों की काट के तौर पर देखा गया है, जिनमें भाजपा को दलित विरोधी बताने की कोशिश की गई थी। हालांकि भाजपा ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि आर्य का चयन केवल हल्द्वानी विवाद के जवाब में किया गया है।
संगठन के पुराने कार्यकर्ता को मिला मौका
भाजपा के इस फैसले का एक अहम पहलू यह भी है कि पार्टी ने किसी बड़े चर्चित चेहरे के बजाय लंबे समय से संगठन में काम कर रहे कार्यकर्ता को राज्यसभा का टिकट दिया है। प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने इसे पार्टी में जमीनी कार्यकर्ताओं के सम्मान से जोड़ते हुए कहा है कि संगठन में समर्पण और निष्ठा का मूल्यांकन किया जाता है।
16 अक्टूबर को राज्यसभा चुनाव
उत्तराखंड की राज्यसभा सीट पर 16 अक्टूबर को चुनाव होना है। मौजूदा राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। दिनेश आर्य 6 अक्टूबर को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। अब उनकी उम्मीदवारी के बाद राज्य की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व, कुमाऊं क्षेत्र और आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़े समीकरणों को लेकर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

