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चारधाम यात्रा से पहले बड़ा अपडेट: बदरीनाथ और केदारनाथ में विशेष पूजा व आरती शुल्क बढ़ा, सामान्य दर्शन रहेगा निःशुल्क

चारधाम यात्रा से पहले बड़ा अपडेट: बदरीनाथ और केदारनाथ में विशेष पूजा व आरती शुल्क बढ़ा, सामान्य दर्शन रहेगा निःशुल्क

विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम में होने वाली विशेष पूजा और आरती के शुल्क में बढ़ोतरी कर दी गई है। यह निर्णय बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की हाल ही में हुई बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया, जिसके बाद दोनों धामों में विशेष सेवाओं के लिए नई दरें लागू कर दी गई हैं।

मंदिर समिति के अनुसार, यह संशोधन लंबे समय से लंबित था और मंदिरों में होने वाली व्यवस्थाओं, रखरखाव तथा पूजा सामग्री की बढ़ती लागत को देखते हुए किया गया है। समिति का कहना है कि विशेष पूजा और आरती के संचालन में संसाधनों और व्यवस्थागत खर्चों में वृद्धि हुई है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।

हालांकि, श्रद्धालुओं के लिए सबसे राहत की बात यह है कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में सामान्य दर्शन व्यवस्था पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क रहेगी। यानी आम भक्त बिना किसी शुल्क के भगवान बदरीविशाल और केदारनाथ के दर्शन कर सकेंगे। केवल विशेष पूजा, अभिषेक और आरती जैसी सेवाओं के शुल्क में ही बदलाव किया गया है।

बीकेटीसी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नई दरें केवल वैकल्पिक सेवाओं पर लागू होंगी और इसका सामान्य दर्शन व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। श्रद्धालु अपनी आस्था और सुविधा के अनुसार विशेष पूजा बुक कर सकेंगे।

चारधाम यात्रा के दौरान हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिरों में भीड़ प्रबंधन और पूजा व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। समिति का मानना है कि शुल्क संरचना में यह संशोधन व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा।

स्थानीय प्रशासन भी यात्रा की तैयारियों में जुटा हुआ है। दर्शन व्यवस्था, कतार प्रबंधन और ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम को पहले से अधिक मजबूत किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

धार्मिक पर्यटन से जुड़े जानकारों का कहना है कि विशेष पूजा सेवाओं की मांग हर वर्ष बढ़ती है, खासकर चारधाम यात्रा के दौरान। ऐसे में शुल्क में बदलाव को व्यवस्थागत सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, यह बदलाव श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित किए बिना मंदिर प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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