“जिहादी ड्रग” मामले में बड़ा खुलासा: देहरादून में NCB की छापेमारी, फैक्ट्री से भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद
“जिहादी ड्रग” से जुड़े कथित नेटवर्क को लेकर जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने शनिवार रात देहरादून स्थित “ग्रीन हर्बल” नामक एक फैक्ट्री पर बड़ी छापेमारी की, जहां से अत्याधुनिक मशीनें, रसायन, कैप्सूल और पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई है।
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान फैक्ट्री में कई ऐसे उपकरण और सामग्री मिली हैं, जिनका उपयोग संदिग्ध ड्रग्स या हर्बल नाम की आड़ में अवैध उत्पाद तैयार करने में किया जा सकता है। टीम ने मौके से कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
एनसीबी अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि फैक्ट्री में तैयार किए जा रहे उत्पादों और उनके वितरण नेटवर्क को लेकर गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। हालांकि, एजेंसी ने अभी तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और कहा है कि पूरी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी मौके पर पहुंची और फैक्ट्री परिसर को सील कर दिया गया है। आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या सबूतों से छेड़छाड़ न हो सके।
जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह मामला केवल एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। एजेंसियां अब सप्लाई चेन और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की भी जांच कर रही हैं।
फैक्ट्री के कर्मचारियों और प्रबंधन से पूछताछ जारी है, वहीं कई संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तैयार उत्पाद कहां-कहां सप्लाई किए जा रहे थे और इनके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मामला अवैध ड्रग निर्माण से जुड़ा पाया जाता है, तो यह राज्य में अब तक के बड़े ड्रग नेटवर्क मामलों में से एक हो सकता है। इससे पहले भी कई राज्यों में हर्बल प्रोडक्ट्स की आड़ में नशीले पदार्थों के कारोबार के मामले सामने आ चुके हैं।
फिलहाल NCB की जांच जारी है और अधिकारियों ने कहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। एजेंसियां पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए सभी संभावित एंगल पर काम कर रही हैं।

