अंकिता भंडारी हत्याकांड: VIP और ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ के दावों से क्यों उठा विवाद, दुष्यंत गौतम का नाम कैसे जुड़ा?
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में हत्या, कथित वीआईपी मेहमान और ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। इस मामले में भाजपा नेता दुष्यंत गौतम का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं और कुछ आरोपों के कारण उछाला गया। हालांकि, किसी वायरल ऑडियो या सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति की संलिप्तता को साबित नहीं माना जा सकता। इसके लिए जांच और अदालत में सामने आए प्रमाण महत्वपूर्ण होते हैं।
1. अंकिता भंडारी हत्याकांड क्या है?
19 वर्षीय अंकिता भंडारी उत्तराखंड के ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों, सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता, को मई 2025 में अदालत ने दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
मामले में एक कथित वीआईपी मेहमान को विशेष सेवाएं देने के दबाव की बात सामने आने के बाद यह सवाल उठा कि वह व्यक्ति कौन था। इसी कथित वीआईपी की पहचान को लेकर बाद में विवाद हुआ।
2. दुष्यंत गौतम का नाम कैसे जुड़ा?
दिसंबर 2025 में सोशल मीडिया पर कुछ कथित ऑडियो क्लिप वायरल हुईं। इन क्लिप को पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर की बातचीत से जोड़कर प्रसारित किया गया। वायरल सामग्री में कथित वीआईपी और ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ का जिक्र होने के साथ दुष्यंत कुमार गौतम का नाम जोड़ा गया।
दुष्यंत गौतम उस समय भाजपा के वरिष्ठ नेता थे। वायरल क्लिप और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उनका नाम इस विवाद से जुड़ने लगा। लेकिन किसी का नाम वायरल ऑडियो में कथित तौर पर आने या सोशल मीडिया पर जोड़े जाने से यह साबित नहीं होता कि वह हत्या में शामिल था।
3. दुष्यंत गौतम का क्या कहना है?
दुष्यंत गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने मानहानि की कानूनी कार्रवाई भी की। अदालत में उनके पक्ष की ओर से कहा गया कि अंकिता हत्याकांड की जांच या मुकदमे में किसी जांच एजेंसी अथवा अदालत ने उन्हें इस अपराध से संबंधित नहीं ठहराया।
कथित ऑडियो की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठे हैं। सुरेश राठौर ने इन क्लिप को एआई से तैयार किया हुआ बताते हुए उनकी सत्यता को चुनौती दी थी। इसलिए ऑडियो में कही गई बातों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
4. अंकिता के माता-पिता अब क्या मांग रहे हैं?
अक्टूबर 2026 में दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद यह विवाद फिर चर्चा में आ गया। अंकिता के माता-पिता ने उनकी नियुक्ति पर रोक लगाने और कथित वीआईपी एंगल की जांच पूरी होने तक कार्रवाई टालने की मांग की। परिवार का कहना है कि इस पहलू की भी पूरी जांच होनी चाहिए।
पूरे मामले का निष्कर्ष
दुष्यंत गौतम का नाम मुख्य रूप से वायरल ऑडियो, सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों और अंकिता के परिवार की मांगों के कारण इस विवाद से जुड़ा है। दूसरी ओर, गौतम आरोपों से इनकार करते हैं और कानूनी कार्रवाई कर चुके हैं।
इसलिए फिलहाल तीन बातों में अंतर समझना जरूरी है: अंकिता की हत्या के मामले में तीन लोगों को दोषी ठहराया जाना, कथित वीआईपी की पहचान को लेकर उठे सवाल और दुष्यंत गौतम पर लगाए गए आरोप। ये तीनों एक ही स्तर पर प्रमाणित तथ्य नहीं हैं। कथित वीआईपी की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष के लिए जांच में सामने आए प्रमाण और कानूनी निष्कर्ष निर्णायक होंगे।

