35 साल पहले सिपाही पति को किया गया था सस्पेंड, आज भी लापता; वाराणसी से नैनीताल पहुंची पत्नी ने एसपी से लगाई गुहार
करीब 35 साल पहले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा सस्पेंड किए गए एक पुलिसकर्मी का आज तक कोई पता नहीं चल पाया है। पति के लापता होने के वर्षों बाद उनकी पत्नी वाराणसी से नैनीताल पहुंचीं और एसपी से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। महिला ने अपने पति की बची हुई नौकरी का लाभ परिवार को दिलाने की मांग की है।
महिला के अनुसार, उनके पति उत्तराखंड पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात थे। करीब 35 साल पहले तत्कालीन एसपी ने किसी मामले में उन्हें निलंबित कर दिया था। निलंबन के बाद से ही उनके पति लापता हो गए। परिवार ने लंबे समय तक उनकी तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।
समय बीतने के साथ परिवार की मुश्किलें बढ़ती चली गईं। महिला का कहना है कि पति के लापता होने के बाद उनके परिवार को न तो उनके बारे में कोई जानकारी मिल सकी और न ही उनकी सेवा से जुड़े लाभों का उचित समाधान हो पाया। अब उम्र के इस पड़ाव पर महिला अपने पति की नौकरी से जुड़े अधिकारों को लेकर अधिकारियों के पास पहुंची हैं।
वाराणसी से नैनीताल पहुंची महिला ने पुलिस अधीक्षक के सामने अपनी पूरी समस्या रखी। उन्होंने बताया कि उनके पति के निलंबन के बाद से वह लापता हैं और इतने लंबे समय के बावजूद उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। महिला ने मांग की कि मामले की पुराने रिकॉर्ड के आधार पर जांच कराई जाए और यदि नियमानुसार संभव हो तो पति की बची हुई नौकरी का लाभ उन्हें या उनके परिवार को दिया जाए।
महिला की फरियाद सुनने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है। करीब साढ़े तीन दशक पुराने मामले में पुलिस रिकॉर्ड और उस समय की कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों को खंगालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके बावजूद महिला की शिकायत के आधार पर पुराने रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सिपाही के निलंबन के बाद विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई थी।
यह मामला पुलिस विभाग के पुराने रिकॉर्ड और लापता कर्मचारी से जुड़े मामलों की स्थिति पर भी सवाल खड़े करता है। इतने लंबे समय तक किसी कर्मचारी के बारे में जानकारी नहीं मिलना परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक रहा होगा।
अब महिला को उम्मीद है कि पुलिस विभाग पुराने दस्तावेजों और सेवा रिकॉर्ड की जांच कर मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाएगा। साथ ही उन्हें यह भी उम्मीद है कि नियमों के अनुसार उनके पति की सेवा से जुड़े लंबित लाभों पर उचित फैसला लिया जाएगा। दशकों बाद सामने आया यह मामला फिलहाल पुलिस विभाग के लिए भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।

