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जीरो वेस्ट महोत्सव’ ने बदल दी मेले की सोच, कचरे को बनाया विकास का आधार

जीरो वेस्ट महोत्सव’ ने बदल दी मेले की सोच, कचरे को बनाया विकास का आधार

जहां आमतौर पर मेले खत्म होते ही कचरे के ढेर और अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आती हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के बागपत जिले ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल पर आयोजित ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक विचार क्रांति बनकर उभरा है।

इस महोत्सव का उद्देश्य है कि बेकार पड़ी चीजें भी विकास और उपयोगिता का आधार बन सकती हैं। आयोजकों ने मेले में ऐसे उपाय अपनाए, जिससे कचरे को न्यूनतम किया जा सके और रिसाइक्लिंग व पुन: उपयोग के तरीके प्रदर्शित किए जा सकें।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि यह महोत्सव सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों में सतत विकास और जिम्मेदार नागरिकता की भावना जगाने का माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि मेले के दौरान कचरे के उचित निपटान, पुन: प्रयोग और कमर्शियल रीसाइक्लिंग के मॉडल को पेश किया गया।

स्थानीय लोग और युवा इस पहल से काफी प्रभावित हुए। कई स्टॉल और प्रदर्शनियों में दिखाया गया कि कैसे रिसाइक्लिंग सामग्री, पुराने वस्त्र, प्लास्टिक और खाने-पीने की बचे हुए सामग्री को नए उत्पाद और कलाकृतियों में बदला जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मॉडल से न केवल पर्यावरणीय लाभ होता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं। बागपत का यह ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अन्य जिलों और शहरों के लिए प्रेरणा बन सकता है।

इस पहल ने साबित किया कि मेले और बड़े आयोजनों में सिर्फ मनोरंजन और बिक्री ही नहीं, बल्कि सतत विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जा सकती है। बागपत का यह मॉडल अब पूरे राज्य में एक उज्ज्वल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

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