गाजियाबाद में ऑनलाइन गेम की लत के चलते तीन मासूम बहनों की मौत की घटना ने समाज में भारी चिंता पैदा कर दी है। इस मामले पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने गंभीर प्रतिक्रिया दी है और बच्चों की सुरक्षा व मानसिक स्वास्थ्य को लेकर विशेष चिंता जताई है।
बबीता चौहान ने कहा कि आज के समय में बच्चों में मोबाइल और ऑनलाइन गेम की लत तेजी से बढ़ रही है। ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के कारण बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। उनका कहना है कि विशेष रूप से कक्षा पांच तक के विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई पर रोक लगनी चाहिए, ताकि उनके स्वास्थ्य और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने सभी स्कूलों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि स्कूल केवल विषम परिस्थितियों में ही होमवर्क और अन्य कार्यों के लिए मोबाइल या डिजिटल माध्यम का उपयोग करें। उनका मानना है कि बच्चों की पढ़ाई और विकास के लिए संतुलित और नियंत्रित डिजिटल शिक्षा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेम और अत्यधिक मोबाइल उपयोग से बच्चों में एकाग्रता की कमी, नींद की समस्या और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके साथ ही, बच्चे सामाजिक गतिविधियों और खेल-कूद से भी दूर हो रहे हैं, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत प्रभावित हो रही है।
बबीता चौहान ने अपील की है कि अभिभावक बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर निगरानी रखें। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट उपयोग को सीमित करें और उन्हें खेल-कूद, पढ़ाई और सामाजिक गतिविधियों में व्यस्त रखें। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सक्रिय भागीदारी बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करेगी।
महिला आयोग ने स्कूलों के लिए सुझाव दिया है कि डिजिटल शिक्षा का उपयोग केवल जरूरी और सीमित मामलों में किया जाए। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के बजाय कक्षा में शिक्षकों के मार्गदर्शन के तहत पढ़ाई करनी चाहिए। बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों में डिजिटल लत और असंतुलित मोबाइल उपयोग गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। यह आवश्यक है कि स्कूल, अभिभावक और राज्य सरकार मिलकर बच्चों के लिए सुरक्षित और नियंत्रित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करें।
गाजियाबाद की इस दुखद घटना ने समाज को यह चेतावनी दी है कि बच्चों की सुरक्षा, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को डिजिटल शिक्षा के बढ़ते उपयोग के साथ संतुलित करना अब अत्यंत जरूरी है।

