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संत प्रेमानंद पर सवाल उठाने वाले फलाहारी बाबा कौन हैं? सपा से भाजपा तक का सफर, विराट-अनुष्का से जुड़े 5 करोड़ रुपये के दावे पर मांगनी पड़ी माफी

संत प्रेमानंद पर सवाल उठाने वाले फलाहारी बाबा कौन हैं? सपा से भाजपा तक का सफर, विराट-अनुष्का से जुड़े 5 करोड़ रुपये के दावे पर मांगनी पड़ी माफी

मथुरा-वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज को लेकर सवाल उठाने वाले फलाहारी बाबा एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके राजनीतिक सफर और क्रिकेटर विराट कोहली तथा अभिनेत्री अनुष्का शर्मा से जुड़े एक पुराने दावे को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में फलाहारी बाबा को धार्मिक प्रवचन देने वाले ऐसे संत के रूप में पेश किया गया है, जिनकी राजनीतिक गतिविधियां भी चर्चा का विषय रही हैं। समाजवादी पार्टी से जुड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की बात भी उनके सार्वजनिक जीवन के संदर्भ में सामने आती है।

संत प्रेमानंद को लेकर क्यों हुई चर्चा?

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज देशभर में अपने प्रवचनों और आध्यात्मिक विचारों के कारण लोकप्रिय हैं। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जाते हैं। इसी बीच फलाहारी बाबा की ओर से प्रेमानंद महाराज को लेकर उठाए गए सवालों ने धार्मिक और सोशल मीडिया जगत में बहस को जन्म दिया।

धार्मिक व्यक्तित्वों के बीच विचारों का अंतर सामने आने पर उनके अनुयायियों की प्रतिक्रियाएं भी चर्चा का हिस्सा बन जाती हैं। हालांकि, किसी संत के बारे में लगाए गए आरोपों या सवालों को तथ्य मानने से पहले उनके मूल बयान और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया देखना जरूरी है।

कौन हैं फलाहारी बाबा?

फलाहारी बाबा का असली नाम दिनेश शर्मा बताया जाता है। वे मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र के महमदपुर गांव से जुड़े हैं और श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष हैं। वे धार्मिक मुद्दों और श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामलों को लेकर बयान देते रहे हैं।दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, दिनेश शर्मा वर्ष 2014 तक समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने दावा किया था कि वर्ष 2017 में उन्हें भाजपा किसान मोर्चा की पंचायत समिति में राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी भी मिली थी, जिसे उन्होंने करीब छह महीने तक संभाला। 

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को लेकर क्या दावा किया था?

विवाद की शुरुआत फलाहारी बाबा के उस दावे से हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा को संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में दर्शन के लिए लाने के वास्ते पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने इसके पीछे प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों और एक निजी कंपनी का हाथ होने का आरोप लगाया था।हालांकि, इस दावे के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया। इसके बाद विराट कोहली की टीम ने आरोपों को झूठा, निराधार और तथ्यहीन बताया। टीम की ओर से कहा गया कि विराट और अनुष्का प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए अपनी आस्था और श्रद्धा के कारण जाते हैं, न कि किसी आर्थिक लेन-देन के तहत। 

विवाद बढ़ा तो मांगनी पड़ी माफी

आरोपों को लेकर मथुरा-वृंदावन के संत समाज में नाराजगी सामने आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, संतों की एक बैठक में फलाहारी बाबा के बहिष्कार और उन्हें धार्मिक मंचों पर आमंत्रित नहीं करने का फैसला भी किया गया।इसके बाद दिनेश शर्मा ने अपने बयान पर सफाई देते हुए संत प्रेमानंद महाराज और उनके अनुयायियों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यदि उनके शब्दों से महाराज या उनके भक्तों को ठेस पहुंची है, तो वे क्षमा चाहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि विवाद के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। 

पहले भी विवादों में रहा नाम

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फलाहारी बाबा इससे पहले भी श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर आरोप लगा चुके हैं। संबंधित पक्ष की आपत्ति के बाद उन्होंने अपने आरोप वापस लेने और उन्हें साबित करने के लिए सबूत नहीं होने की बात भी कही थी। इन घटनाओं के चलते उनके बयानों और दावों पर लगातार चर्चा होती रही है। फिलहाल, विराट कोहली को पांच करोड़ रुपये दिए जाने का दावा उनकी टीम खारिज कर चुकी है और फलाहारी बाबा माफी मांग चुके हैं। ऐसे में इस पूरे विवाद में आरोपों, उनके खंडन और बाद में दी गई सफाई को अलग-अलग समझना जरूरी है।

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