वीडियो में देखें महाशिवरात्रि पर शिवमय हुई काशी, शिव-पार्वती विवाह उत्सव की गूंज, विश्वनाथ धाम में उमड़ी आस्था
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर धर्मनगरी काशी पूरी तरह शिवमय हो गई है। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व पर काशी हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठी। मंदिरों, घाटों और गलियों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा और पूरा शहर भक्ति और आस्था के रंग में रंगा नजर आया।
वाराणसी स्थित विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि को लेकर विशेष आयोजन किए गए। यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है और पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थापित है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव स्वयं ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर को आकर्षक फूलों और रोशनी से सजाया गया। सुबह से ही श्रद्धालु जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर जारी है। शिव बारात और विवाह उत्सव की झांकियां भी निकाली जा रही हैं, जिन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है।
काशी में भगवान शिव और माता पार्वती के आगमन की कथा भी बेहद रोचक और पौराणिक महत्व की है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव विवाह के बाद माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर रहने लगे थे। हालांकि, कैलाश का शांत और निर्जन वातावरण माता पार्वती को अधिक समय तक अनुकूल नहीं लगा। उन्होंने अपने पति से किसी जीवंत और पवित्र स्थान पर रहने की इच्छा जताई।
माता पार्वती की इस इच्छा को पूरा करने के लिए भगवान शिव उन्हें अपने प्रिय स्थान काशी लेकर आए। गंगा के तट पर बसी इस पवित्र नगरी को उन्होंने अपना स्थायी निवास बनाया। तभी से भगवान शिव काशी में ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं और इस नगरी को मोक्षदायिनी माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि काशी भगवान शिव की प्रिय नगरी है और यहां निवास करने वाले भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बनी रहती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर इस पौराणिक कथा का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का उत्सव मनाया जाता है।
महाशिवरात्रि के इस पर्व पर काशी में आस्था, परंपरा और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। गंगा घाटों से लेकर विश्वनाथ धाम तक हर ओर शिवभक्ति की गूंज है और श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।

