विनीत मनोचा हत्याकांड: बेगुनाह साबित हुई बहू शालू जेल से रिहा, भाई से लिपटकर रोई
कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड में आरोपी बनाई गई बहू शालू सोमवार को जेल से बाहर आ गई। करीब 21 दिन जेल में रहने के बाद रिहाई मिलते ही शालू अपने भाई से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ी। परिजनों के लिए यह भावुक पल रहा।
शालू समेत तीन लोगों को 7 सितंबर को जेल भेजा गया था। पुलिस की जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश में शालू की भूमिका नहीं थी, बल्कि उसके पति सुब्रत के शामिल होने की बात सामने आई है। इसके बाद शालू को राहत मिली और वह जेल से बाहर आ गई।
जेल से निकलते ही छलके आंसू
जेल से बाहर आने के बाद शालू जैसे ही अपने भाई से मिलीं, वह भावुक हो गईं। उन्होंने भाई को गले लगाया और काफी देर तक रोती रहीं। परिवार के सदस्यों ने भी राहत की सांस ली।
शालू लगातार खुद को निर्दोष बताती रही थीं। उनका कहना था कि उन्हें मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है और हत्या की साजिश में उनका कोई हाथ नहीं है।
पुलिस जांच में बदला घटनाक्रम
विनीत मनोचा हत्याकांड की शुरुआती जांच में शालू समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने सभी आरोपियों से पूछताछ की और मामले से जुड़े साक्ष्यों की जांच की।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस के सामने यह तथ्य आया कि हत्या की साजिश में शालू नहीं बल्कि उसका पति सुब्रत शामिल था। इसके बाद मामले में शालू की भूमिका को लेकर स्थिति बदली और उसे रिहाई मिल गई।
7 सितंबर को भेजा गया था जेल
पुलिस कार्रवाई के बाद 7 सितंबर को शालू समेत तीन आरोपियों को जेल भेजा गया था। इस दौरान शालू को भी मामले में आरोपी बनाया गया था। हालांकि, जांच के बाद पुलिस के निष्कर्ष में बदलाव आया।
अब इस मामले में पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। हत्या की साजिश और अन्य आरोपों को लेकर जांच जारी है। मामले में अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

