UP में स्मार्ट मीटर पर यू-टर्न, प्रीपेड हटाकर पोस्टपेड लागू; जानें क्या फायदा-नुकसान
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर जारी विवाद के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रीपेड सिस्टम से पीछे हटने का संकेत दिया है। अब राज्य में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मॉडल पर संचालित करने की तैयारी की जा रही है। सरकार के इस यू-टर्न को जनता के बढ़ते विरोध और लगातार मिल रही शिकायतों से जोड़कर देखा जा रहा है। बिजली उपभोक्ताओं का आरोप था कि प्रीपेड स्मार्ट मीटरों में बिजली खर्च अधिक दिखाया जा रहा था, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था।
दरअसल, प्रदेश में स्मार्ट मीटर योजना को बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने और बिलिंग में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। शुरुआत में इसे प्रीपेड मॉडल पर शुरू किया गया, जिसमें मोबाइल रिचार्ज की तरह पहले पैसे जमा कराने के बाद ही बिजली इस्तेमाल की जा सकती थी। लेकिन जैसे-जैसे स्मार्ट मीटर लगने लगे, वैसे-वैसे उपभोक्ताओं की शिकायतें भी बढ़ने लगीं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि पुराने मीटर की तुलना में स्मार्ट मीटर ज्यादा यूनिट दिखा रहे हैं और बैलेंस तेजी से खत्म हो रहा है।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। कई जगहों पर उपभोक्ताओं ने प्रदर्शन किया और बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने अब प्रीपेड व्यवस्था को हटाकर पोस्टपेड मॉडल अपनाने का फैसला किया है। यानी अब उपभोक्ताओं को पहले की तरह महीने के अंत में बिजली बिल मिलेगा और बाद में भुगतान करना होगा।
सरकार का कहना है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह बंद नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि केवल भुगतान प्रणाली में बदलाव किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार पोस्टपेड मॉडल से उपभोक्ताओं की दिक्कतें कम होंगी और लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। साथ ही स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली खपत की रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन बिलिंग और बिजली चोरी रोकने जैसे फायदे जारी रहेंगे।
हालांकि इस फैसले के अपने फायदे और नुकसान दोनों बताए जा रहे हैं।
क्या होंगे फायदे?
सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उपभोक्ताओं को बार-बार रिचार्ज कराने की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी क्योंकि वे महीने के अंत में बिल चुका सकेंगे। इसके अलावा अचानक बैलेंस खत्म होने पर बिजली कटने जैसी समस्या भी कम होगी। उपभोक्ता अपनी खपत का रिकॉर्ड मोबाइल ऐप के जरिए आसानी से देख सकेंगे।
क्या हैं नुकसान?
विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टपेड मॉडल में बिजली बिल बकाया बढ़ने का खतरा फिर से पैदा हो सकता है। प्रीपेड व्यवस्था में बिजली कंपनियों को पहले ही भुगतान मिल जाता था, जिससे राजस्व नुकसान कम होता था। अब बकाया वसूली की पुरानी समस्या दोबारा सामने आ सकती है। इसके अलावा कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों में जो अविश्वास पैदा हुआ है, उसे दूर करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
फिलहाल सरकार इस फैसले को जनता के हित में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन आने वाले समय मे

